डुप्लेसिस की ऑस्ट्रेलिया को सलाह- विराट कोहली से टकराने से बचें

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मेलबर्न : दक्षिण अफ्रीका के कप्तान फाफ डु प्लेसिस ने भारत के खिलाफ सीरीज से पहले ऑस्ट्रेलिया को सलाह देते हुए कहा है कि वे विराट कोहली से टकराने से बचे और उसके सामने चुप रहें। डु प्लेसिस ने शुक्रवार को कहा कि उनकी टीम ने इस साल की शुरुआत में खेली गई सीरीज में कोहली का सामना चुपचाप किया था। उन्होंने कहा, ‘अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्हें टकराव पसंद है। विराट कोहली भी उनमें से एक है।’

दक्षिण अफ्रीका ने उस सीरीज में भारत को 2-1 से हराया था लेकिन कोहली ने तीन टेस्ट में 47.66 की औसत से 286 रन बनाए थे। डु प्लेसिस ने कहा, ‘हर टीम में ऐसे एक दो खिलाड़ी हैं जिनके बारे में हम उनके खिलाफ खेलने से पहले बात करते हैं। हमारी रणनीति उनके सामने खामोश रहने की ही होती है।’ उन्होंने कहा, ‘कोहली शानदार खिलाड़ी है। हम उसके सामने चुप रहे लेकिन उसने फिर भी रन बनाए लेकिन बहुत ज्यादा नहीं।

उधर,ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को छींटाकशी नहीं करने की नसीहत से भारतीय कप्तान विराट कोहली को भी अच्छा महसूस हो रहा है और उन्हें खुशी है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी सीरीज में एक दूसरे पर फब्तियां कसने के कारण होने वाले विवाद नहीं होंगे। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर आमूलचूल बदलाव के दौर से गुजर रहे थे और पूर्व के क्रिकेटरों की किसी भी कीमत पर जीत दर्ज करने की नीति को बढ़ावा नहीं दिया जा रहा है। कोहली और वरिष्ठ तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा का मानना है कि यह पूरी तरह से ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों पर निर्भर करता है कि वे अपनी क्रिकेट किस तरह से खेलना चाहते हैं लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया कि उनके खिलाड़ी छींटाकशी के मामले में अपनी तरफ से पहल नहीं करेंगे।

कोहली ने टीम की रवानगी से पहले मीडिया कहा था, ‘मुझे लगता कि यह (छींटाकशी नहीं की नीति) उनका बेहद निजी मामला है। लेकिन जब मैदान पर बहस में शामिल होने या जिसे लोग झगड़ा नाम दे देते हैं, उसकी बात है तो मुझे इस तरह की किसी कहा सुनी के बिना के बिना खेलना अच्छा लगेगा।’ कोहली की एक समय उनके आक्रामक व्यवहार के कारण आलोचना झेलनी पड़ती थी लेकिन उन्होंने कहा कि वह अपने करियर के उस दौर से निकल चुके हैं और एक व्यक्ति के रूप में अधिक परिपक्व हो गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘मैं खुद की स्थिति से खुश हूं। मुझे निजी तौर पर अब इस बारे में सोचने की जरूरत नहीं है। मेरे कहने का मतलब है कि मुझे अपनी क्षमताओं पर पूरा भरोसा है। मैं बिना किसी प्रेरणा के खेल सकता हूं। अपने करियर के शुरुआती वर्षों के दौरान मुझे जो अहसास होता था वे बेहद अपरिपक्व चीजें थी।’

ईशांत शर्मा ने कहा कि अगर ऑस्ट्रेलियाई पूर्व की तरह छींटाकशी करते हैं तो उन्हें दिक्कत नहीं होगी क्योंकि अगर वे शुरुआत करते हैं तो वह भी जवाब देने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा, ‘देखते हैं कि ऑस्ट्रेलियाई क्या करते हैं। हमें वहां पहुंचने के बाद ही पता चलेगा। आप उनसे मित्रवत व्यवहार की उम्मीद नहीं कर सकते। आप को वहां कड़ी परिस्थितियां मिलती है। जब आप अपने देश के लिए खेल रहे होते हो तो कोई भी आपको आसानी से रन या विकेट नहीं देता है। अगर यह कड़ा खेल है तो आपको भी कड़ा होना होगा और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।’

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