2 वर्ष की बच्ची की एक्टिंग काबिले ए तारीफ,’पीहू’ देखकर रोंगटे खड़े हो जाएंगे आपके!

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जेपी यादव मुम्बई। विनोद कापड़ी एक बार फिर से लोगों को चौंकाने के लिए फिल्म लेकर आए हैं ‘पीहू’। फिल्म में न तो कोई बड़ा अभिनेता है और न ही अभिनेत्री। सच्ची घटना पर आधारित फिल्म ‘पीहू’ में केवल दो साल की बच्ची ने ही अभिनय किया है। बच्ची की एक्टिंग और एक्सप्रेशन्स से लोग हैरान हैं। 24 अक्टूबर को फिल्म का ट्रेलर रिलीज किया गया था जिसे देखने के बाद लोग सहम गए थे। नन्ही सी बच्ची ऐसे सीन देते हुए नजर आई थी जिसे देने में बड़े-बड़े सितारे तक डरते हैं।फिल्म ‘पीहू’ को लेकर पहली राय..ये महानगरों के अकेलेपन, दबाव और तनाव के बीच दम तोड़ते संबंधों और रिश्तों से रिस रिस कर खत्म होती जा रही आत्मीयता के साथ बहुत कुछ कह पाने में कामयाब रही है. ‘पीहू’ देखकर आने के बाद भी ये आपके जहन में कहीं अटक सी जाती है और आपको खुद से कई सवाल करने के लिए विवश कर देती है.कहानी- उत्तर प्रदेश का गाजियाबाद शहर..जहां एक बहुमंजिला इमारत के एक फ्लैट में रहता है दो साल की पीहू का परिवार..उसके पापा, उसकी मम्मी और पीहू..दो साल पूरे होने पर परिवार में हुई है पीहू की जन्मदिन की पार्टी..इस पार्टी के अगले दिन की कहानी है पीहू..इस पार्टी के बाद ऐसा क्या हुआ कि पीहू अकेली हो गई? एक दो साल की बच्ची को जब भूख लगेगी तो वह क्या करेगी? दरवाजे की घंटी बजेगी तो वह क्या करेगी? फोन बजेगा तो वह टूटी फूटी जबान से कैसे समझा पाएगी कि उसके घर में क्या हुआ है जो वह अकेली हो गई है? 92 मिनट की ‘पीहू’ को मैने बिना इंटरवल देखा और यकीन मानिए इस फिल्म ने हिला कर रख दिया..स्क्रीनप्ले और ये सिनेमा में ये प्रयोग पहली बार देखा था. खासतौर पर भारतीय सिनेमा में, विनोद कापड़ी ने दो साल की पीहू के जरिए हमें बहुत बड़ी बात सिखा दी.एक्टिंग- ये फिल्म ‘पीहू’ की है जो असल जिंदगी में भी पीहू ही है..जिस मासूमियत से पीहू ने इस किरदार को जिया है या यूं कहें कि निर्देशक विनोद कापड़ी ने बच्ची के हर भाव को आहिस्ता आहिस्ता कैप्चर किया है वो काबिल ए तारीफ है. फिल्म में पीहू के अलावा बाकी किरदार सिर्फ ध्वनियों में है जो गजब का प्रयोग है. ‘पीहू’ फिल्म में पीहू नाम की ही बच्ची की फिल्म में है। फिल्म के डायरेक्टर विनोद कापड़ी ने पीहू में ऐसा कुछ दिखाया है जिसे देखकर यकीन कर पाना बेहद मुश्किल है। पीहू एक दिन घर में बिल्कुल अकेली होती है। बेड पर बच्ची की मां मरी हुई पड़ी है इस बात की जानकारी न तो पीहू को है और न किसी पड़ोसी को। बच्ची अपनी मां के लिए चिंता भी करती है तो कभी भूख की वजह से गैस में रोटियां भी सेकने लगती है। बच्ची ने कुछ ऐसे सीन भी दिए हैं जो आपको अवाक कर सकते हैं। खासतौर पर जब पीहू खुद को फ्रिज में बंद कर लेती है।पीहू की मां के शरीर में चोट के निशान भी परेशान कर देने वाले हैं। अपनी तोतली आवाज में पीहू मां से खाना देने की बात कहती है तो कभी बालकनी में जाकर चढ़ जाती है। बालकनी के सीन को देखने के बाद आपके मन में एक बार बच्ची को बचाने का ख्याल जरुर आता है। सिनेमाघरों में बैठे दर्शकों के फिल्म के खतरनाक सीन को देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। डेढ़ घंटे की फिल्म में आप एक मिनट के लिए भी स्क्रीन से नजरें हटाने का रिस्क नहीं लेंगे। फिल्म मनोरंजन से भरपूर और पैसा वसूल है। तो क्या पीहू की जान को भी है खतरा? आखिर क्या हुआ है पीहू की मां के साथ। जैसे तमाम सवालों को जानने के लिए आपको सिनेमाघरों का रुख करना पड़ेगा। फिल्म में बच्ची के एकदम नैचुलर एक्ट किया है। फिल्म ‘पीहू’ को हमारी ओर से पांच में से 4.6 स्टार्स दिए गए हैं।

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