भीम आर्मी एक बार फिर यूपी की दलित राजनीति में उबाल लाने की तैयारी में

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लोकसभा चुनाव से पहले यूपी की दलित राजनीति में एक बार फिर उबाल लाने की तैयारी है. इसके लिए तारीख बाबरी विध्वंस यानी 6 दिसंबर की चुनी गई है. भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने जेल में बंद पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और सदस्यों की रिहाई को लेकर 6 दिसंबर से देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है. माना जा रहा है कि इस आंदोलन से एक बार फिर से दलित राजनीति को गर्माने की तैयारी है. चंद्रशेखर ने बताया कि भीम आर्मी 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान हुई हिंसा के आरोप में जेल बंद पार्टी कार्यकर्ताओं, सदस्यों और दलित नेताओं की रिहाई के लिए देशव्यापी आंदोलन करने जा रही है. यह घोषणा उन्होंने बुधवार को मुजफ्फरनगर में की. उन्होंने कहा कि रिहाई न होने पर 6 दिसंबर से आंदोलन शुरू किया जाएगा. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी-एसटी एक्ट में किए गए संशोधन के विरोध में दो अप्रैल को दलित संगठनों द्वारा आहूत भारत बंद के दौरान व्यापक हिंसा हुई थी. इस दौरान कई जगह दुकानें बंद कराने को लेकर दलितों का व्यापारियों से टकराव होने के साथ ही पथराव की घटनाएं हुईं थीं. वहीं, बवालियों को हिरासत में लिए जाने से भड़की भीड़ ने नई मंडी कोतवाली पर ही सीधा हमला कर दिया था, जिसमें दर्जनों वाहन फूंक डाले गए थे. बवाल में एक युवक की गोली लगने से मौत भी हुई थी/ मामले में पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए भीम आर्मी व उससे जुड़े दलित संगठनों के कई पदाधिकारियों समेत अन्य सदस्यों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इनमें से अधिकांश अभी भी सलाखों के पीछे हैं. मंगलवार को भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने गुपचुप तरीके से जिला कारागार पहुंचकर वहां बंद दलित नेता उपकार बावरा समेत अन्य दलित पदाधिकारियों से मुलाकात की थी. इसके बाद बुधवार को भीम आर्मी के योगेश कुमार, राजन गौतम, बिजेंद्र गौतम, रोहित गौतम, अनुराग बावरा, विनीत, अजय व प्रवेश ने गांव अल्मासपुर में आयोजित पत्रकार वार्ता में जेल में बंद दो अप्रैल के बवाल के आरोपियों को बेकसूर बताते हुए उनकी जल्द से जल्द जेल से रिहाई किए जाने की मांग की

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