Vodafone Idea पर 1.12 लाख करोड़ का कर्ज, सिर्फ 3 महीने में 5 हजार करोड़ का घाटा

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नई दिल्ली: वोडाफोन आइडिया को चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में 4,973 करोड़ रुपए का एकीकृत घाटा हुआ है। दोनों कंपनियों के विलय के बाद यह पहला वित्तीय परिणाम है। वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर का विलय 31 अगस्त, 2018 को पूरा हुआ था।

वोडाफोन आइडिया ने बयान में कहा कि समीक्षाधीन तिमाही के नतीजों में 30 अगस्त, 2018 तक के आइडिया सेल्युलर के परिणाम और वोडाफोन आइडिया के 31 अगस्त से 30 सितंबर तक के नतीजे शामिल हैं। इसलिए इन परिणामों की तुलना पिछले साल की समान अवधि से नहीं की जा सकती। कंपनी को शुल्क को लेकर प्रतिस्पर्धा की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

बयान में कहा गया है कि ग्राहक कम औसत राजस्व प्रति ग्राहक (एआरपीयू) की ओर स्थानांतरित हो रहे हैं, जिससे तिमाही दर तिमाही आधार पर एआरपीयू 4.7 प्रतिशत घटकर 88 रुपए रह गया।  देश की सबसे बड़ी दूरसंचार आपरेटर के ग्राहकों की संख्या 42.2 करोड़ है। तिमाही के दौरान कंपनी की आमदनी 7,663 करोड़ रुपए रही। वोडाफोन आइडिया ने कहा कि विलय के बाद संपत्ति और परिचालन के बीच तालमेल बेहतर तरीके से आगे बढ़ रहा है।

बयान में कहा गया है कि कंपनी के निदेशकों की एक समित 25,000 करोड़ रुपए जुटाने की संभावित योजना का मूल्यांकन करेगी। प्रवर्तक शेयरधारकों ने संकेत दिया है कि वे इसमें 18,250 करोड़ रुपए का योगदान करेंगे। वोडाफोन समूह ने इसमें 11,000 करोड़ रुपए और आदित्य बिड़ला समूह 7,250 करोड़ रुपए का योगदान करने का संकेत दिया है।

कंपनी अपने फाइबर नेटवर्क की बिक्री की भी संभावना तलाश रही है। विलय के बाद बनी इकाई का कुल कर्ज 30 सितंबर, 2018 को 1.26 लाख करोड़ रुपए था। बयान में कहा गया है कि कंपनी की नकदी और नकदी सदृश्य संपत्तियां 136 अरब रुपए की हैं। इस तरह उस पर शुद्ध कर्ज 1.125 लाख करोड़ रुपए है।

 

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