सबरीमाला: कोर्ट 22 जनवरी को पुनर्विचार याचिकाओं पर करेगा सुनवाई, अपने फैसले पर रोक से इनकार

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प्रेस24 न्यूज़ – Press24 News, KNMNनई दिल्ली/तिरूवनंतपुरम। उच्चतम न्यायालय ने केरल में स्थित सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के अपने फैसले पर रोक लगाने से मंगलवार को इनकार कर दिया परंतु वह इस पर पुनर्विचार के लिए दायर याचिकाओं पर खुले न्यायालय में 22 जनवरी को सुनवाई के लिये तैयार हो गया।

फैसले पर कोई रोक नहीं लगाए जाने के कारण अब यह देखना होगा कि क्या 10 से 50 वर्ष की आयुवर्ग वाली महिलाएं इस बार मंदिर में प्रवेश कर पाएंगी। इससे पहले न्यायालय के 28 सितंबर के फैसले के बाद दो बार में कुल 8 दिनों के लिए मंदिर खुलने के बावजूद कुछ संगठनों के विरोध की वजह से इस आयुवर्ग की महिलाएं मंदिर में दर्शन नहीं कर पाई थीं।

प्रदर्शनकारियों ने महिलाओं को निलक्कल और पंबा के आधार शिविर पर ही रोक दिया था। दो महीनों तक चलने वाली मंडला मकाराविल्लाक्कू तीर्थयात्रा 17 नवंबर से शुरू हो रही है और इस दौरान देशभर से यहां लाखों श्रद्धालु जुटते हैं।

न्यायालय के फैसले को बदलने का अनुरोध करने वाली 48 पुनर्विचार याचिकाओं को मंजूर करने और 22 जनवरी को खुली कोर्ट में इस पर सुनवाई करने के आज के निर्देश का बीजेपी, कांग्रेस और अयप्पा मंदिर में पुजारियों ने स्वागत किया है।

मृत्युदंड के मामलों को छोड़कर उच्चतम न्यायालय खुली कोर्ट में पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई नहीं करता। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने कहा है कि चूंकि उच्चतम न्यायालय ने सबरीमला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने संबंधी 28 सितंबर के अपने फैसले पर रोक नहीं लगाई है, इसलिए उनकी सरकार कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने के बाद इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करेगी।

एक अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार द्बारा सबरीमला के मुद्दे पर चर्चा के लिये एक सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है। कुल मिलाकर 48 पुनर्विचार याचिकाएं इस मामले में दायर की गई हैं। शीर्ष अदालत ने 28 सितंबर को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 4:1 के बहुमत से सबरीमला मंदिर में 10 से 50 साल की आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी को लैंगिक भेदभाव करार देते हुए अपने फैसले में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी। 

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने चैंबर में इन पुनर्विचार याचिकाओं पर गौर किया और सारे मामले में न्यायालय में सुनवाई करने का निश्चय किया। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति आर एफ नरिमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा शामिल हैं।

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि सभी पुनर्विचार याचिकाओं पर सभी लंबित आवेदनों के साथ 22 जनवरी, 2019 को उचित पीठ के समक्ष सुनवाई होगी। हम स्पष्ट करते है कि इस न्यायालय के 28 सितंबर, 2018 के फैसले और आदेश पर कोई रोक नहीं है।

चैंबर में कार्यवाही के दौरान वकील उपस्थित नहीं होते। इससे पहले, दिन में न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि सबरीमला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने के निर्णय पर पुनिर्वचार के लिये दायर याचिकाओं का निबटारा होने के बाद ही इस मुद्दे पर किसी नई याचिका की सुनवाई की जाएगी।

पीठ ने जी विजय कुमार, एस जया राजकुमार और शैलजा विजयन की फैसले को चुनौती देने वाली 3 नई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। इससे पहले शीर्ष अदालत ने 9 अक्टूबर को नेशनल अय्यप्पा अनुयायी एसोसिएशन की पुनर्विचार याचिका पर शीघ्र सुनवाई करने से इंकार कर दिया था। 
उधर तिरूवनंतपुरम में विजयन ने संवाददाताओं से कहा कि राज्य सरकार इस विषय पर कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेगी।

दरअसल, उनसे पूछा गया था कि क्या शीर्ष न्यायालय का फैसला 17 नवंबर से शुरू हो रहे मंडल मकरविलाक्कु तीर्थ यात्रा के दौरान लागू होगा। वहीं, सबरीमला मंदिर के तंत्री (मुख्य पुजारी)कंदारू राजीवरू ने उच्चतम न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि ये एक बड़ी जीत है, यह अयप्पा की जीत है। केंद्रीय मंत्री के जे अल्फोंस ने भी फैसले का स्वागत किया और कहा कि लोकतंत्र में जनता सर्वोपरि है।

केरल से बीजेपी नेता अल्फोंस ने कहा कि मुझे लगता है कि यह बहुत अच्छा फैसला है। मुझे लगता है कि इस मुद्दे पर केरल एकमत है और इसलिए मैं खुश हूं कि उच्चतम न्यायालय ने पूरे मुद्दे पर पुनर्विचार का फैसला किया है। केरल विधानसभा में विपक्षी नेता रमेश चेन्नीथला ने सबरीमला में संवाददाताओं से कहा कि माकपा नीत एलडीएफ सरकार को समझदारी से काम करना चाहिए और आगामी दो महीने की तीर्थयात्रा के दौरान इस फैसले को लागू नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि खुली अदालत में पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करने के शीर्ष न्यायालय के फैसले का हम स्वागत करते हैं। बीजेपी के प्रदेश प्रमुख पीएस श्रीधरण पिल्लई ने उच्चतम न्यायालय के फैसले को एक अच्छा फैसला बताया। उन्होंने भगवान अयप्पा मंदिर की परंपराओं को बचाने के लिए उत्तर केरल के कासरगोड से पथनमथिट्टा (जहां सबरीमला स्थित है) तक एक रथ यात्रा निकाली थी।

उन्होंने कहा कि हमने उच्चतम न्यायालय के आज के फैसले की भावना को स्वीकार किया है। माकपा के प्रदेश सचिव के. बालकृष्णन ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का जो कुछ फैसला आता है, सरकार को उसे लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम शीर्ष न्यायालय के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि जो कुछ फैसला आएगा उसे लागू किया जाएगा।
प्रेस24 न्यूज़ – Press24 News, KNMN

 

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