RBI के मुद्दे पर कांग्रेस ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को घेरा,आखिर धारा सात पर बात करने की जरूरत क्यों पड़ी

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नयी दिल्ली: कांग्रेस ने बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक विवाद पर सरकार को घेरते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली से सवाल किया कि ऐसी क्या आपात स्थिति पैदा हो गई जो सरकार को रिजर्व बैंक कानून की धारा 7 का सहारा लेने की जरूरत पड़ गई। इस धारा का अब तक कभी इस्तेमाल नहीं किया गया।

यह प्रावधान सरकार को रिजर्व बैंक गवर्नर के साथ विचार विमर्श के बाद उन मुद्दों पर केंद्रीय बैंक को निर्देश देने का अधिकार देता है जिनके बारे में सरकार को लगता है कि यह मुद्दा गंभीर और जनहित का है। इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अर्थव्यवस्था के बारे में तथ्यों को छिपा रही है और कुछ ‘हड़बड़ी’ में नजर आ रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार पूरी तरह से देश के सभी संस्थानों को नष्ट करने पर जुटी है। ये संस्थान देश का आधार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हमने सीबीआई के मामले में ऐसा देखा। प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने अब रिजर्व बैंक को निशाना बनाया है।  मनीष तिवारी ने कहा कि हम वित्त मंत्री से पूछना चाहते हैं कि ऐसी क्या आपात स्थिति थी कि सरकार को रिजर्व बैंक कानून की धारा 7 के तहत प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी। अभी तक सरकार ने इस पर चीजें साफ नहीं की हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि आरबीआई कानून की धारा 7 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई गंभीर वित्तीय स्थिति बन रही है तो जनहित में सरकार केंद्रीय बैंक को निर्देश जारी कर सकती है। तिवारी ने कहा कि भारत की आजादी के सात दशक में कभी धारा 7 का इस्तेमाल नहीं किया गया।

बता दें कि हाल ही में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा था कि बैंकों की स्वायत्ता में किसी तरह की दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसके साथ ये भी कहा था कि सरकारें टी-20 की तरह सोचती हैं। लेकिन केंद्रीय बैंक टेस्ट मैच की तरह आगे बढ़ना चाहता है। इस बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि देश की सभी संस्थाओं में मौजूदा सरकार दखलंदाजी कर रही है।

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