सत्यवती ने इन तीन शर्तों को पूरा करने के बाद किया था ऋषि पाराशर के प्रेम को स्वीकार, जानिए क्या था इसका महाभारत से संबंध

0
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

प्रेस24 न्यूज़ – Press24 News, KNMNधर्म डेस्क। अधिकतर लोग भले ही इस बात से परिचत न हों कि सत्यवती कौन थी लेकिन आपको बता दें कि सत्यवती का महाभारत के युद्ध से गहरा संबंध था। अगर सत्यवती न होती तो शायद महाभारत का युद्ध हुआ ही न होता। आइए आपको बताते हैं सत्यवती कौन थी और क्या था इसका महाभारत के युद्ध से संबंध ………..



पौराणिक कथाओं के अनुसार, सत्यवती बहुत ही सुंदर थी और उसका जन्म एक मछली के गर्भ से हुआ था इसी वजह से उसमें से मछली जैसी दुर्गंध आती थी। शरीर से मछली की दुर्गंध आने के कारण कोई भी उसके समीप नहीं आता था। वहीं एक बार ऋषि पाराशर की नजर सत्यवती पर पड़ी और वह उसे देखकर मोहित हो गए। ऋषि पाराशर ने सत्यवती से अपने प्रेम का इजहार करते हुए उसके समक्ष संसर्ग की इच्छा रखी लेकिन सत्यवती इस बाद से सहमत नहीं हुई। जब ऋषि पाराशर ने उससे बार-बार निवेदन किया तो वह तीन शर्तों पर ऋषि पाराशर के साथ संसर्ग करने को तैयार हुई।

सभी प्राणियों पर नजर रखते हैं आकाश में बैठे पूषन देवता, जानिए क्यों आया शिवजी को उन पर क्रोध



सत्यवती की पहली शर्त ये थी कि ऐसा करते हुए उन्हें कोई न देखे और इस शर्त को पूरा करते हुए ऋषि पाराशर ने एक कृत्रिम आवरण बना दिया, जिसकी वजह से कोई उन्हें नहीं देख सकता था। सत्यवती जानती थी कि ऋषि पाराशर उसके साथ विवाह नहीं कर सकते हैं इसी वजह से उसने दूसरी शर्त ये रखी की उसकी कौमार्यता भंग नहीं होनी चाहिए, इस शर्त को पूरा करते हुए ऋषि ने आश्वासन दिया कि जैसे ही बच्चे का जन्म होगा उसकी कौमार्यता पहले जैसी हो जाएगी। सत्यवती की तीसरी शर्त ये थी कि उसके शरीर से आने वाली मछली की गंध खत्म हो जाए और उससे सुगंध आने लगे, ऋषि पाराशर ने उसकी इस शर्त को भी पूरा किया और उसके शरीर से आने वाली दुर्गंध उत्तम सुगंध में परिवर्तित हो गई। 

भारत के इन शिव मंदिरों में दिखता है भोलेनाथ का अनोखा रूप, लोग देखकर रह जाते हैं हैरान



इन तीन शर्तों को पूरा करने के बाद ऋषि पाराशर और सत्यवती ने संसर्ग किया जिसके परिणामस्वरूप उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हुई। इस पुत्र का नाम कृष्णद्वैपायन रखा गया और आगे चलकर ये महर्षि वेद व्यास के नाम से प्रसिद्ध हुआ। आपको बता दें कि धृतराष्ट्र, पांडु और विदुर को महर्षि वेद व्यास का ही पुत्र माना जाता है। अगर महर्षि वेद व्यास न होते तो इन तीनों का जन्म न होता और अगर ये तीनों न होते तो शायद महाभारत का युद्ध हुआ ही न होता। 

(ये सभी जानकारियां शास्त्रों और ग्रंथों में वर्णित हैं, लेकिन इन्हें अपनाने से पहले किसी विशेष पंडित या ज्योतिषी की सलाह अवश्य ले लें।)

कहीं आपकी तरक्की की राह में भी तो बाधाएं उत्पन्न नहीं कर रहीं राशि अनुसार आपके अंदर की ये कमियां

भूत-प्रेत का साया होने पर व्यक्ति को अपने हाथ में रखनी चाहिए ये चीज, आत्माएं नहीं पहुंचा सकती नुकसान
प्रेस24 न्यूज़ – Press24 News, KNMN

 

Source link

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

You might also like More from author

Comments

Loading...
%d bloggers like this: