नई राष्ट्रीय ई-वाणिज्य नीति का मसविदा जारी

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केंद्र सरकार ने नई राष्ट्रीय ई-वाणिज्य नीति का मसविदा बीते सप्ताह शनिवार को जारी कर दिया। इसमें सीमा पार डाटा प्रवाह पर रोक के लिए कानूनी व तकनीकी ढांचा तैयार करने व कंपनियों के लिए संवदेनशील आंकड़ों को स्थानीय तौर पर संग्रहण, प्रसंस्करण करने और उन्हें दूसरे देशों में रखने को लेकर कई तरह की शर्तों का प्रावधान किया गया है। मसविदा नीति में कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) उपकरणों के जरिए डाटा संग्रह और ई-वाणिज्य मंचों, सोशल मीडिया, सर्च इंजन के जरिए भारत में एकत्रित उपयोगकर्ताओं की जानकारी सहित खास स्त्रोतों से सीमा पार आंकड़ों के प्रवाह को प्रतिबंधित करने का आधार तैयार करने के लिए रूपरेखा ढांचा बनाया जाएगा।

42 पृष्ठ के इस मसविदे में ई-वाणिज्य तंत्र के छह व्यापक विषयों-डाटा, अवसंरचना विकास, ई-वाणिज्य प्लेटफार्म, विनियमन संबंधी मुद्दों, घरेलू डिजिटल, अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने और ई-वाणिज्य के जरिए निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देने को शामिल किया गया है। राष्ट्रीय ई-वाणिज्य नीति भारत के विकास के लिए भारतीय डाटा शीर्षक से जारी मसौदे में कहा गया है।

आज के समय में यह आम धारणा हो गई है कि डाटा नया ईंधन है। तेल के विपरीत डाटा का प्रवाह एक दूसरे देश में बिना किसी रोक टोक के होता है। विदेश में इसे संरक्षित किया जा सकता है या इसका प्रसंस्करण किया जा सकता है और प्रसंस्करण करने वाला सारी अहम जानकारी को अपने पास रख सकता है। इसलिए भारत के डाटा का इस्तेमाल देश के विकास में होता है और भारतीय नागरिकों व कंपनियों को डाटा के मौद्रीकरण का आर्थिक मिलना चाहिए।

नीति के मसविदे के मुताबिक भारत में किसी संवेदनशील डाटा को एकत्र करने या प्रसंस्कृत करने व दूसरे देश में उसे संरक्षित करने वाली कंपनियों की कुछ खास शर्तों का पालन करना होगा। इन शर्तों में कहा गया है कि विदेश में संरक्षित ऐसे किसी भी डाटा को ग्राहक की सहमति के बावजूद भी देश के बाहर किसी अन्य कंपनी के साथ साझा नहीं किया जा सकता है। मसविदे में कहा गया है कि डाटा को किसी भी मकसद से किसी तीसरे पक्ष को उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है।

ऐसे में आंकड़ों को भारतीय अधिकारियों की अनुमति के बगैर दूसरे देशों की सरकारों से साझा नहीं किया जा सकता है। सरकार ई-वाणिज्य कंपनियों पर नकेल कसने की तैयारी में है। सरकार का कहना है कि वह ऐसा फ्री और फेयर बिजनेस प्रेक्टिस के लिए यह कदम उठा रही है। उसने प्रतिस्पर्धा बाजार में अमेजॉन और फ्लिपकोर्ट द्वारा कुछ मोबाइल कंपनियों द्वारा सस्ते पर मोबाइल बेचने के बाद कदम उठाने की तैयारी की है।

वन प्लस आसुस बीपीएल इलेक्ट्रिोनिक्स द्वारा अमेजॉन और फ्लिपकोर्ट पर निश्चित अवधि के डील के तहत 5-5 लाख मोबाइल बेचना शुरू किया और चंद घंटों में सेल के जरिए करोड़ों रुपए मुनाफा कमाया। सरकार को यह गंवारा नहीं हुआ और वह अब फेयर बिजनेस प्रैक्टिस के नाम से इन कंपनियों पर शिकंजा कस रही है। इसीलिए ई-वाणिज्य नीति का मसविदा जारी किया गया है।

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