सीट बंटवारे पर भाजपा के सहयोगी दल नाराज

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लोकसभा चुनावों के लिए बड़े दलों के साथ तालमेल के बाद भाजपा को छोटे सहयोगी दलों की नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में अपना दल और सुहेलदेव भारत समाज पार्टी, महाराष्ट्र में रिपब्लिकन पार्टी (आठवले) और तमिलनाडु में डीएमडीके जैसे उसके छोटे सहयोगी दलों ने अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है। इसके पहले बिहार में रालोसपा एनडीए से बाहर हो चुकी है। मिशन 2019 के लिए बड़े लक्ष्य के लिए भाजपा राज्यवार चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। इसमें नए बड़े दलों के साथ आने के बाद सीटों के बंटवारे में छोटे सहयोगी दलों को घाटा हो रहा है। इसस नाराजगी बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सहयोगी पार्टी सुहेलदेव भारत समाज पार्टी की नाराजगी चल रही है। उसकी भी राज्य सरकार को लेकर समस्याओं के साथ एक लोकसभा सीट की मांग है। भाजपा नेतृत्व ने फिलहाल इन पर कोई फैसला नहीं किया है।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में होने वाली बैठक में सहयोगी दलों के सारे मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा। पार्टी के सूत्रों का कहना है कि चुनाव के समय सभी दबाव बनाते हैं, लेकिन कोई भी सहयोगी दल दूर नहीं जाएगा। महाराष्ट्र में भी भाजपा के सहयोगी व केंद्र सरकार में मंत्री रामदास आठवले नाराज है। आठवले ने कहा कि राज्य की 48 सीटों को भाजपा और शिवसेना ने आपस में बांट लिया है उससे बात तक नहीं की। आठवले मुंबई की एक सीट व उससे बाहर एक सीट चाहते हैं।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि आठवले को भाजपा राज्यसभा में लेकर आई थी और मंत्री भी बनाया। लोकसभा में उसका दावा नहीं बनता है। वैसे भी मुंबई में जो सीट मांग रहे हैं, वहां से शिवसेना का सांसद है। इसी तरह तमिलनाडु में भी पिछली बार की सहयोगी विजयकांत के नेतृत्व वाली डीएमडीके नाराज है। इस बार उसे दो से तीन सीट देेने की बात की जा रही है। केंद्र सरकार में मंंत्री अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल ने तो खुलकर कहा है कि उनकी मांगों की तरफ भाजपा नेतृत्व कोई ध्यान नहीं दे रहा है।

ऐसे में उनके सामने सारे विकल्प खुले हुए हैं। अपना दल के नेता सपा और कांग्रेस के भी संपर्क में है। बीते लोकसभा चुनाव में अपना दल को भाजपा ने उत्तर प्रदेश में दो सीटें दी थी और उसने दोनों सीटें जीती थी। इस बार अपना दल एक दो सीट ज्यादा चाहता है। प्रदेश सरकार में हिस्सेदारी लेकर भी उसकी मांगे है। भाजपा का कहना है कि 2014 और 2019 की परिस्थियां अलग है। पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा के साथ कोई नया सहयोगी नहीं जुड़ा है। इसलिए वहां पर सीटों का बंटवारा मोटे तौर पर पिछली बार की तरह ही रहेगा। महाराष्ट्र में भी कमोवेश वही स्थिति है। तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक जैसा बड़ा दल आने के बाद स्थितियां बदली है। ऐसे में पिछली बार जैसा फार्मूला नहीं हो सकता है। बिहार में भी जदयू के साथ आने के बाद स्थितियां बदली थी।

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