हम आपसी सहयोग के लिए बने हैं

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जिस प्रकार से शरीर के संचालन में सभी अंगों का योगदान रहता है उसी प्रकार जीवन संचालन में परिजनों, परिचितों, सगे-सम्बन्धियों, समाज और पड़ौसियों-साथ काम करने वालों का भी बहुत योगदान रहता है। सहयोग के अनेक तरीके होते हैं- मन से, भावना से, शरीर से, ज्ञान से, किसी के द्वारा, अर्थ से व्यवहार से, जानकारी देकर या फिर अन्य किसी भी तरीके से। इन सबका नाम ही मानव जीवन है, एक दूसरे का सहयोग करना ही समग्र जीवन है, सफल जीवन है और प्रेममय जीवन है। यह आपसी सहयोग मनुष्य को सामाजिक बनाता है, जिम्मेदार बनाता है और सफल इंसान बनाता है।

बहुत पहले से एक कहानी सुनते आए हैं जो आज भी प्रासांगिक है और मानव जीवन को बहुत प्रेरित करती है। किसी समय दो मित्र थे। मित्र थे तो साथ-साथ भी रहते थे। एक का नाम पत्ता था तो दूसरे का नाम ढ़ेला था। बड़े आनंद के साथ रहते थे। लेकिन एक दिन शाम को हवा कुछ तेज चलने लगी और तेज से और तेज होने लगी। पत्ता तेज हवा के रुख को देखकर बहुत घबरा गया, उसे अपनी मृत्यु नजदीक दिखाई देने लगी। उसने अपने मित्र ढ़ेला से कहा कि- हे मित्र, ये तेज हवा मुझे उड़ाकर ले जाएगी, अब मेरी मृत्यु नजदीक है, अब हम बिछुड़ जाएंगे। इस पर ढ़ेला ने कहा कि- हे मेरे मित्र, घबराने की कोई बात नहीं है, मैं तुम्हारी पूरी मदद करूंगा और वह पत्ते के ऊपर बैठ गया। कुछ समय के बाद तेज हवा चलना बंद हो गई।

पत्ते ने अपने मित्र को गले लगा लिया, बहुत धन्यवाद दिया और ढ़ेले के प्रति पूरे सम्मान से भर गया। कुछ दिनों के बाद आकाश में घने-काले बादल छा गए। यह देखकर ढ़ेला बहुत घबरा गया और अपने मित्र पत्ते से बोला- हे मित्र, इस बारिश से मेरा शरीर गल जाएगा और मेरी मृत्यु हो जाएगी। जैसे ही बूंदाबांदी शुरू हुई पत्ता ढ़ेले के ऊपर बैठ गया। कुछ समय के बाद में बूंदाबांदी रूक गई। ढ़ेले ने भी अपने मित्र को गले लगा लिया और बहुत धन्यवाद दिया। ढ़ेला अपने मित्र के प्रति सम्मान से भर गया। आइए, हम भी अपने मित्रों, परिचितों और अनजान लोगों के प्रति संवेदनाओं से भरें, संकट मोचक बनें फिर आपके भी संकट दूर होंगे।

प्रेरणा बिन्दु:-
किसी का साथ देकर तुम
सच्चे साथी बन जाओ
दीये में तेल तो है, पर
उसकी बाती बन जाओ।

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