स्टार्टअप को सरकार से बड़ी राहत

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केंद्र सरकार ने टैक्स वसूली के नोटिस से घबराए सैंकड़ों स्टार्टअप को बड़ी राहत दी है। उसने नियम-शर्तों की उलझनों को खत्म करते हुए सीधे 25 करोड़ रुपए तक निवेश पाने वाले स्टार्टअप को टैक्स से छूट दे दी है। यही नहीं, स्थापना या पंजीकरण के दस साल की अवधि तक कोई कंपनी स्टार्टअप के दायरे में आएगी। पहले यह अवधि सात साल थी। यहां यह बता दें कि किसी भी इकाई को स्टार्टअप तभी माना जाएगा, जब यदि उसका कारोबार पंजीकरण से लेकर अब तक किसी भी वित्त वर्ष में 100 करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं हो। इससे पहले यह सीमा 25 करोड़ रुपए थी। 25 करोड़ रुपए की सीमा से आगे 100 करोड़ रुपए नेटवर्क या 250 करोड़ रुपए का कारोबार करने वाली सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा किसी पात्र स्टार्टअप में किए गए निवेश को भी आयकर अधिनियम की धारा 56 (2) (सात बी) के तहत छूट दी जाएगी। प्रवासियों के निवेश को भी इस धारा के तहत छूट मिलेगी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने बीते सप्ताह मंगलवार को इसकी घोषणा की। प्रभु ने कहा कि किसी भी स्टार्टअप में सभी निवेशकों से प्राप्त कुल 25 करोड़ रुपए तक की राशि पर छूट होगी। परिजन या प्रमोटर द्वारा किया गया 25 करोड़ तक का निवेश भी कर मुक्त होगा। यहां यह उल्लेखनीय है कि हाल ही में कई स्टार्टअप ने शिकायत की थी कि उन्हें एंजेल निवेश पर कर नोटिस मिले हैं, जिससे कारोबार प्रभावित हुआ है। यहां यह बता दें कि आयकर कानून की धारा 56 (2) वीआईआईबी के मुताबिक कोई स्टार्टअप बाजार मूल्य से ज्यादा निवेश प्राप्त करता है तो उस अंतर की राशि पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाएगा। इसे ही एंजेल टैक्स कहते हैं।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने तीन बड़े ऐलान किए। पहला यह कि 10 साल की अवधि तक स्टार्ट कर छूट का लाभ ले सकेगा। दूसरा 100 करोड़ रुपए तक के कारोबार वाले स्टार्टअप के दायरे में होंगे। तीसरा यह कि 10 साल पुरानी कंपनी भी स्टार्टअप कहलाएगी। इस तरह स्टार्टअप में निवेश संबंधी कुछ और नियमों को लचीला बनाया है। इस तरह निवेश को दायरा बढ़ने और स्टार्टअप कंपनियों को कुछ गति मिलने की उम्मीद बनेगी। आतंरिक व्यापार संवर्धन विभाग इसे लेकर उत्साहित है। यहां यह भी बता दें कि स्टार्टअप केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। इसे इसे मकसद से शुरू किया गया था कि देश के तकनीकी रूप से दक्ष युवा नौकरियों के पीछे भागने के बजाए अपना काम शुरू कर सकेंगे।

नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। अभी तक बहुत सारे युवा इसलिए अपना कारोबार शुरू नहीं कर पा रहे थे कि उन्हें पूंजी जुटाने में मुश्किलें आती थी। मगर मौजूदा सरकार ने इसके लिए अलग से प्रावधान किए और नए रोजगार शुरू करने के लिए खूब प्रोत्साहित किया। बैंकों से कर्ज की सुविधा बढ़ाई गई। ऋण संबंधी शर्तों को लचीला बनाया गया। मगर जैसी उम्मीद की गई थी, यह योजना वैसी गति नहीं पकड़ पाई। माना जा रहा था कि कंपनियां स्टार्टअप योजना ेमें निवेश के लिए आगे आएंगी, नए उद्यमों को प्रोत्साहन देगी और अपने कारोबार में बढ़ोतरी करेगी। मगर उत्साहजनक नतीजे नहीं निकल पाए। इसलिए नए संशोधन के तहत निवेश करने वाली कंपनियों के लिए आयकर में छूट की सीमा बढ़ाई गई है।

माना जा रहा है कि स्टार्टअप योजना के गति पकड़ने से न सिर्फ रोजगार संबंधी समस्या का समाधान निकलेगा, बल्कि विकास दर को भी लक्ष्य तक पहुंचाने में आसानी रहेगी। इसलिए स्टार्टअप को गति देने की सरकार की चिंता स्वाभाविक है। अच्छी बात है कि सरकार ने नए उद्यमों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ छोटे और मझोले उद्यमों की स्थिति सुधारने पर भी ध्यान केंद्रित किया है। पिछले दिनों छोटे और मझोले उद्यमों को एक करोड़ रुपए तक के कर्ज बिना शर्त दिए गए। कोई भी बैंक ऐसे उद्यमों को कर्ज देने से मना नहीं कर सकता। इसी क्रम में स्टार्टअप को आगे बढ़ाने का प्रयास हो रहा है।

इस तरह इन इकाइयों की दशा सुधरने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। पर हकीकत यह है कि कोई भी कारोबार सिर्फ उत्पादन पर ज्यादा समय तक नहीं टिकता। उसके लिए बाजार की जरूरत पड़ती है। स्टार्टअप के तहत उत्पादन पर तो जोर है, पर बाजार में खपत उस अनुपात में बढ़ने की गुंजाइश बहुत कम रह गई है। विदेशी बाजारों में भी भारत के लिए कम जगह है। निर्यात की दर संतोषजनक नहीं है।

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