जानिए! आखिर क्यों महाभारत के युद्ध में मारे गए योद्धा एक रात के लिए हुए जीवित

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धर्म डेस्क। महाभारत का युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच का युद्ध था जिसमें पांडवों की जीत हुई और कौरवों ने लड़ते—लड़ते युद्ध भूमि में अपने प्राण त्याग दिए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार युद्ध में मारे गए कौरव एक रात के लिए पुन: जीवित हुए, आखिर वे एक रात के लिए क्यों जीवित हुए आइए आपको बताते हैं इस रोचक कथा के बारे में

युद्ध में कौरवों को हराकर युधिष्ठिर ने राजगद्दी संभाली तो उन्होंने कौरवों के माता—पिता यानि धृतराष्ट्र और गांधारी को अपने साथ रखा और युधिष्ठिर उनका पूरा ध्यान रखते थे लेकिन भीम को ये दोनों पसंद नहीं थे इसी वजह से जब भी मौका मिलता भीम उनका तिरस्कार कर देता। एक बार भीम ने कुछ ऐसा कह दिया जो धृतराष्ट्र और गांधारी से सहन नहीं हुआ और वे महल को त्यागकर वन में जाकर रहने लगे, उनके साथ कुंती ने भी वन जाने का निर्णय किया और साथ ही संजय और विदुर भी उनके साथ गए। सभी वन में आश्रम बना वहां रहकर तप करने लगे।

काफी समय होने के बाद युधिष्ठिर सभी को देखने के लिए वन गए, उन्होंने देखा कि सभी तप कर रहे हैं। युधिष्ठिर के सा​थ महर्षि वेदव्यास भी थे और वे सभी के तप से प्रसन्न हुए और उनसे कुछ मांगने को कहा, धृतराष्ट्र और गांधारी ने उनसे युद्ध में मारे गए अपने पुत्रों को देखने की कामना की और इसके बाद महर्षि वेदव्यास ने अपनी तप शक्ति के जरिए कौरव और पांडव दोनों पक्षों से मृत योद्धाओं का गंगा तट पर आवाहन किया। धीरे-धीरे महाभारत के युद्ध में मारे गए सभी योद्धा वहां प्रकट हुए और सभी एक रात के लिए साथ रहकर पुन: देवलोक को प्रस्थान किया।

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