तापमान में उतार-चढ़ाव से बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले

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राजस्थान, दिल्ली समेत देश के पश्चिमी राज्यों में तेजी से पांव पसार रहे इन्फ्लुएंजा एच1 एन1 यानी स्वाइन फ्लू की ताकत पिछले दो महीनों से तापमान में आ रहे तेज उतार-चढ़ाव से मिल रही है। मौसम में आए अचानक बदलाव से मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, इन परिस्थितियों में वायरस अधिक शक्तिशाली हो जाता है। इसके चलते लोग आसानी से स्वाइन फ्लू के चपेट में आ जाते है।

इस साल पहले 40 दिनों में देश में स्वाइन फ्लू के मामलों की संख्या 9367 पर पहुंच गई थी 10 फरवरी को समाप्त सप्ताह में सामने आए 2666 नए मामलों की देखें तो पूरी आशंका है कि बीते सप्ताह में ही स्वाइन फ्लू मरीजों की संख्या 10 हजार के पार हो गई होगी। वहीं इस साल स्वाइन फ्लू से अब तक 312 मौतें रिकार्ड की गई है। इसमे ज्यादातर मामले राजस्थान, गुजरात, पंजाब और दिल्ली समेत 11 राज्यों से जुड़े हुए है। डॉक्टरों के मुताबिक तापमान में अचानक उतार-चढ़ाव स्वाइन फ्लू के मामलों में तेजी का जिम्मेदार है। अगर तापमान तेजी से बदलता है तो मनुष्य की रोगों सेे लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। जागरूकता और हाईजीन में कमी स्वाइन फ्लू समस्या को और बढ़ा देते हैं।

उदाहरण के लिए यदि किसी मरीज को स्वाई फ्लू हुआ, उसे घर पर आईसोलेट कर दिया जाए तो बीमारी आगे नहीं बढ़ेगी। लेकिन अधिकतर लोगों को इसकी जानकारी नहीं होती, इसलिए यह घर के दूसरे लोगों को भी चपेट में ले लेती है। डॉक्टरों ने इससे बचाव के लिए कहा है कि अगर घर में किसी को स्वाइन फ्लू हो तो उसे कुछ अलग कमरे में रखा जाए। रूमाल की जगह टिश्यू पेपर का प्रयोग करें क्योंकि रूमा में वायरस चिपककर रह सकता है।

इसके अलावा अभिवादन में लोगों से हाथ मिलाने के बजाए उनसे भारतीय स्टाइल में हाथ जोडक़र नमस्ते करें। जितना अधिक हो सके उतनी बार हाथ धोएं। कहीं बाहर से घर आने पर एक बार जरूर हाथ धोएं। बाकी सरकार की ओर से अखबारों में दिए जा रहे विज्ञापनों में बताए गए उपायों की अनुपालना करें।

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