विद्यार्थी एकाग्रचित होकर पढ़ें और आगे बढ़ें

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शिक्षा में प्रत्येक कालांश बहुत महत्वपूर्ण होता है। यदि उसमें शिक्षक और शिष्यों के द्वारा अच्छी तरह से ध्यान देकर, रुचि लेकर नहीं पढ़ाया जाए, नहीं पढ़ा जाए तो फिर उस कालांश का औचित्य ही खत्म हो जाएगा। शिक्षक की भी यह पवित्र जिम्मेदारी है कि वह पूरे मनोयोग से अपने ज्ञान को शेयर करे क्योंकि उसकी एक-एक बात बहुत महत्वपूर्ण होती है।

उसका प्रत्येक शब्द और वाक्य विद्यार्थियों के जीवन निर्माण में महत्वपूर्ण कदम होता है। अगर किसी शिक्षक ने अपने कालांश में कुछ समय फालतू की बातों में, व्यक्तिगत बातों में या फिर निगेटिव बातों में जाया कर दी तो यह न केवल बच्चों के साथ खिलवाड़ होगा बल्कि देश और मानव धर्म के साथ भी बड़ा खिलवाड़ होता है। ऐसे में यदि शिक्षक पूरे मनोयोग से अपना दायित्व निभा रहा है, लेकिन विद्यार्थी उसका सही उपयोग नहीं कर रहे हैं तो भी यह केवल उनकी ही क्षति नहीं है बल्कि राष्ट्रीय क्षति भी होती है।

इसका एक उदाहरण:-अध्यापक महोदय कक्षा में पढ़ा रहे थे, अपनी बात को बहुत सार्थकता के साथ आगे बढ़ा रहे थे और साथ-साथ में विषय वस्तु के सार को श्याम पट्ट पर लिखकर समझा रहे थे। आगे बैठे विद्यार्थी शिक्षक की बात को, ज्ञान को बड़े ध्यान से ले रहे थे जबकि पीछे बैठे विद्यार्थी आपस में एक-दूसरे से कुछ कह रहे थे। एक ने कहा- आओ चले और देखेंगे कोई मूवी, अरे! तू भी चल युवी। इसी दौरान गुरुजी ने बताया कि दिल्ली में कुतुबमीनार है। शिक्षक को यह अच्छे से पता था कि पीछे वाले विद्यार्थी उसकी बातों को ध्यान से नहीं सुन रहे हैं। शिक्षक महोदय ने पीछे बैठे एक विद्यार्थी से पूछा- मैंने अभी-अभी क्या-क्या बताया है, पीछे वाला विद्यार्थी तुरंत बोला- आपने हमें बताया है कि दिल्ली में कुत्ता बीमार है।

अर्थात् वह दिल्ली में कुतुबमीनार को दिल्ली में कुत्ता बीमार बता रहा था। इस प्रकार वह अनमोल समय और जीवन निर्माण की धज्जियां उड़ा रहा था। शिक्षक और विद्यार्थी एक दूसरे के पूरक हैं एक दूसरे के लिए प्रिय हैं और एक दूसरे के लिए पवित्र है। विद्यार्थी को पढ़ाने में शिक्षक की अहम् भूमिका होती है और शिक्षक को आगे बढ़ाने में भी विद्यार्थी की अहम् भूमिका होती है। आइए, कक्षा-कक्ष के वातावरण को सुखद, सार्थक, सरल और सफल बनाएं, तभी हम सफल होंगे।

प्रेरणा बिन्दु:-
कक्षा का प्रत्येक कालांश जीवन निर्माण की दिशा में एक कदम होता है और एक-एक कदम ही मंजिल की ओर ले जाते हैं।

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