सुरक्षा बलों का आतंकियों को सबक सिखाने का संकल्प

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पाकिस्तानी नागरिक जैश कमांडर कामरान को ढ़ेर करने के साथ ही घाटी में जैश के आतंकियों के खात्मे का अभियान तेज कर दिया है। सुरक्षा बलों ने शीर्ष 25 आतंकियों की सूची बनाई है, जिन्हें एक महीने में निपटाने का लक्ष्य रखा है। जैश के करीब 60 आतंकियों के घाटी में होने की खबर है। इनमें आधे पाकिस्तानी आतंकी है। कई स्तरों पर आतंकी गतिविधियों के खिलाफ अभियान की रणनीति पर काम हो रहा है। सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार पुलवामा हमले के बाद सुरक्षा बलों का एक ही संकल्प है- घाटी में आतंकवाद को ऐसी चोट पहुंचानी है, जिससे वे उबर न पाएं। इसके लिए कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े।
शीर्ष स्तर पर तैयारियां संकेत दे रही है कि सीमा पार से मिले निर्देश पर देश की सुरक्षा को चुनौती देने वाले बड़े हमले का जवाब देने पर सरकार बहुत गंभीर है। प्रधानमंत्री कार्यालय को हर दिन का अपडेट भेजा जा रहा है। 2018 में बीते साल की तुलना में 80 फीसदी ज्यादा हमले (614) हुए। यही नहीं 5 साल में करीब 339 जवान भी शहीद हुए। 2018 में 91 जवान शहीद हुए। हालांकि 2014 में आतंकियों से मुठभेड़ में 47 जवान शहीद हुए थे। पुलवामों में बीते सोमवार को हमले के मास्टर माइंड के साथ मुठभेड़ में सुरक्षा बलों को पत्थरबाजों का भी सामना करना पड़ा। सुरक्षा बलों ने पूरा इलाका खाली करा लिया था। मगर स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और पत्थरबाजी भी की। भीड़ को त्तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को गोलियां चलानी पड़ी। इस अभियान में सेना, सीआरपीएफ और एसओजी के जवानों ने संयुक्त अभियान चलाया।

सुरक्षा बल 14 फरवरी को हुए हमले के बाद उस स्थल के करीब 15 किलोमीटर के दायरे में व्यापक अभियान चलाया हुआ है। सुरक्षा बलों ने आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान सोमवार को पुलवामा के पास पिगलानी स्थित उस इमारत को धमाके से ड़ा दिया जिसमें आतंकी छिपे हुए थे। मुठभेड़ स्थल से एक एके-47 और एक पिस्टल बरामद हुई है। सूत्रों के अनुसार आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन की कड़ी में रविवार देर रात करीब 12 बजे पुलवामा के पिगलानी में कुछ आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली। इसके बाद तत्काल अभियान शुरू कर दिया गया। सूचना मिली है कि जम्मू-कश्मीर में आईईडी विस्फोटों को अंजाम देने के लिए आतंकियों ने अपने तरीको में बदलाव किया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक धमाके के लिए आतंकी बाइक और वाहनों की चोरी रोकने के उपयोग होने वाले रिमोट अलार्म या चाबियों का इस्तेमाल ज्यादा करने लगे हैं।

आशंका है कि पुलवामा में जवानों पर हुए हमले में इसी तरीके को अपनाया था। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद रोधी क्षेत्र में कार्यरत जांच एवं सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार आतंकियों ने रिमोट संचालित आईईडी विस्फोट को असरदार बनाने के लिए तरीके बदले हैं। अब मोबाइल फोन, वॉकी-टॉकी और दुपहिया या चार-पहिया वाहनों को चोरी रोकने में उपयोग होने वाले यंत्रों का इस्तेमाल कर आईईडी विस्फोट कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार ये उपकरण बाजारों में बड़ी आसानी से उपलब्ध होते हैं। कश्मीर घाटी में मौजूद आतंकवादी, रिमोट संचालित आईईडी विस्फोटों को अंजाम देने के लिए इन उपकरणों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे वे न सिर्फ सुरक्षा बलों के साथ आमने-सामने की मुठभेड़ से बचते हैं, बल्कि ऐसे हमलों में हताहतों की संख्या भी अधिक होती है।

राज्य में आईईडी विस्फोट के इतिहास और इसके उभरते चलन पर जारी रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि नक्सली विस्फोट में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का इस्तेमाल आतंकी भी बढ़ा सकते है। पुलवामा हमले की जांच कर रहे जांच कर्ताओं ने आशंका जताई है कि 14 फरवरी को हुए विस्फोट को जैश-ए-मोहम्मद के एक आतंकवादी ने अंजाम दिया। इसके लिए आतंकी ने एक कार में आरडीएक्स मिश्रित विस्फोट रखा था और जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर जवानों के काफिले में सैनिकों को लेकर जा रही एक बस को निशाना बनाया था।

यहां यह बतादें कि कुछ समय पहले शोपिया जिले में सेना की 44 राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों को निशाना बनाकर आईईडी विस्फोट किया गया था। इसे दुपहिया वाहनों को चलाने एवं बंद करने में इस्तेमाल होने वाली रिमोटयुक्त चाबी का इस्तेमाल हुआ था। किसी भी आतंकी वारदात के बाद उसके मास्टरमाइंड का पता लगाना, उसे पकड़ना या मार गिराना ऐसा काम है, जिसे सुरक्षा बल काफी मुस्तैदी से करते रहे हैं। सुरक्षा बलों ने यही किया। उन्होंने इस काम को चार दिन में ही अंजाम दे दिया। इसके लिए हमें सुरक्षा बलों की तारीफ तो करनी ही चाहिए। यह बड़ी कामयाबी है, लेकिन असल षडयंत्रकारियों को सबक सिखाना अभी बाकी है।

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