किसी ने पूछा जीवन का मकसद क्या है

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जीवन है तो सब कुछ है, वरना कुछ भी नहीं। सब कुछ जीवन के पीछे है, जीवन सबसे आगे हैं। इसका सीधा सा मतलब यही हुआ कि जीवन अनमोल है। ऐसे में यह प्रश्न उभर कर आता है कि जब जीवन इतना महत्वपूर्ण है तो फिर इसका मकसद क्या है? यह पूछा जाता है उनसे जो देश, समाज, अध्यात्म और संस्कृति का वहन कर रहे है और पूछा जाता है उन लोगों के द्वारा जो अपने को दीन-हीन, गरीब और आशंकाओं से भरा हुआ मानते हैं। जीवन के साथ बहुत खिलवाड़ किया जा रहा है, इसे व्यर्थ गंवाया जा रहा है, जाया किया जा रहा है।

एक बात तय है कि वे लोग कभी प्रश्न नहीं पूछते हैं जो हर हाल में प्रसन्न रहते हैं, हर हाल में खुशहाल रहते हैं, मुस्कारते रहते हैं, आनंद से भरे रहते हैं, सुख से भरे रहते हैं, आगे बढ़ते रहते हैं, धैर्य से सबकी सुनते हैं, धैर्य से मन की करते हैं, धैर्य से मन से करते हैं। जुनून जिनका मन होता है, हिम्मत जिनके पैर होते हैं। मेरी नजर में जीवन का मकसद हर पल आनंद से भरा रहना है और आनंद बांटते रहना है।

यह जीवन एक केंद्र और धैर्यवान ड्राइवर की तरह है, जो हमेशा समय पर सही सलामत अपने लक्ष्य पर पहुंचता है लेकिन यह अफसोस की बात है कि आज लोग जीवन को एक अनट्रेण्ड ड्राइवर की तरह चला रहे हैं, जो किसी भी वक्त इसे दुर्घटनाग्रस्त कर सकते हैं। आइए अपने जीवन के साथ न्याय करें, तभी दूसरों के साथ न्याय कर पाएंगे, खुद के जीवन को सम्मान दें, तभी दूसरों के जीवन का सम्मान कर पाएंगे। जीवन की कीमत सामने आती मौत से तय होती है।

प्रेरणा बिन्दु:-
गति है तो प्रगति है, प्रगति है तो सद्गति है, सद्गति है तो आनंद है और आनंद है तो जीवन है।

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