इंटरनेट पर अश्लील सामग्री : सत्यार्थी की डेटा सेवा प्रदाता कंपनियों पर लगाम कसने की मांग

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इंदौर। भारत के हजारों नौनिहालों को बाल मजदूरी से मुक्त कराने के लिये नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजे गये सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने इंटरनेट की दुनिया में अश्लील कंटेंट की बाढ़ रोकने के लिए डेटा सेवा प्रदाता कम्पनियों पर कानूनी शिकंजा कसने की मांग की है। सत्यार्थी ने यहां एक साक्षात्कार में पीटीआई-भाषा से कहा कि ऑनलाइन माध्यमों पर पोर्न की बाढ़ से नई पीढ़ी नैतिक रूप से बर्बाद हो रही है।

फिलहाल ऐसा कोई कानून नहीं है जो इन माध्यमों पर पोर्न का प्रवाह पूरी तरह रोकने के लिये दूरसंचार क्षेत्र की डेटा सेवा प्रदाता कंपनियों पर सीधी पाबंदी लगाता हो।उन्होंने कहा कि हमारी कोशिशों के बाद सरकार ने देश में कई पोर्न वेबसाइटों पर हालांकि प्रतिबंध लगा रखा है।

लेकिन ऐसी वेबसाइटों पर रोक लगाने भर से कुछ नहीं होगा, क्योंकि अत्याधुनिक तकनीक से लैस लोगों के पास ऑनलाइन माध्यमों पर पोर्न का जाल फैलाने के 100 तरीके हैं। सत्यार्थी ने कहा कि आमतौर पर देखा गया है कि किसी एक पोर्न वेबसाइट को बंद किया जाता है, तो नए नाम से दूसरी वेबसाइट बनाकर दोबारा अश्लील कंटेंट पेश कर दिया जाता है।

वह जोर देकर कहते हैं कि पोर्नोग्राफी पर प्रभावी रोक के लिये डेटा सेवा प्रदाता कम्पनियों पर कानूनी लगाम कसी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ठोस कानून बनाकर इन कम्पनियों को निर्देशित किया जाना चाहिये कि वे इस बात को सुनिश्चित करने के लिये पुख्ता तकनीकी इंतजाम करें कि उनकी सेवाओं का उपयोग करने वाले लोग ऑनलाइन माध्यमों पर अश्लील कंटेंट की अपलोडिंग और डाउनलोडिंग कर ही नहीं सकें।

सत्यार्थी को पाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई के साथ वर्ष 2014 के नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। भारत के 65 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि पोर्नोग्राफी एक वैश्विक समस्या है। लिहाजा मैं चाहता हूं कि संयुक्त राष्ट्र ऐसा अधिवेशन बुलाये जिसमें उसके सभी सदस्य देशों को इस बात के लिये विधिक रूप से बाध्य किया जाये कि वे पोर्नोग्राफी, ऑनलाइन माध्यमों पर बच्चों का यौन उत्पीड़न और बाल तस्करी रोकने के लिये अपने-अपने स्तर पर विशेष कानून बनाएंगे।

सत्यार्थी ने बताया कि वह दुनिया भर के प्रमुख सियासी नेताओं और अन्य प्रभावशाली हस्तियों से मिलकर इस विषय में आम सहमति बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। उन्होंने यह भी सुझाया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और इंटरपोल के जरिये ऐसा वैश्विक तंत्र विकसित किया जा सकता है जो ऑनलाइन माध्यमों पर पोर्न कंटेंट और भड़काऊ सामग्री का प्रवाह रोकने के लिए रीयल टाइम निगरानी करता रहे।

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