प्रबल इच्छा शक्ति सपना साकार कर देती है

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यदि इच्छा शक्ति है तो सपना है, यदि प्रबल इच्छा शक्ति है तो सपना साकार है और यदि सपना साकार है तो जीवन का सार सबके सामने आ जाता है। बिना इच्छा शक्ति सपना नहीं और बिना किस सपने के जीवन का कोई सार नहीं है। किसी गांव में एक युवा था। उसके साथ सब कुछ अच्छा चल रहा था। उसके माता-पिता के पास बहुत सारे खेत थे। खेतों में बहुत सारा अनाज पैदा होता था। अच्छा सा घर था। उस युवक का नाम मनीष था। वह पढ़ाई में अव्वल तो था कि खेलों में भी उसकी गहरी रुचि थी। वह अपनी पढ़ाई के साथ-साथ घर के काम में भी अपने माता-पिता का हाथ बंटाता था। ये सारे संस्कार उसे अपने माता-पिता से मिले थे। उसे बड़ों को सम्मान देने में बहुत आनंद आता था। वह रोजाना अपने शिक्षकों सहित अनेक बड़े लोगों से भी आशीर्वाद लेता था। सब कुछ अच्छा ही नहीं बहुत अच्छा चल रहा था, वह बी.एस.सी. कर चुका था।

उसने जीवन में एक बहुत बड़ा सपना संजोया था। वह एक युवक मनीष से आदर्श युवक मनीष बनना चाहता था। उसने सोचा कि दुनिया में बहुत कुछ गलत हो रहा है। जिस दादा-दादी ने माता-पिता ने अपने खून-पसीने से एक-एक पाई जोडक़र, एक-एक ईंट इकट्ठी करके जिस घर को बनाया, जहां खुशी का संसार बनाया, आज उसी घर में वे बेघर हो रहे हैं, वे विवश हैं वे सिसक रहे हैं, रिश्ते-नाते केवल नाम में सिमट कर रह गए हैं, संयुक्त परिवार तार-तार हो रहे हैं, मातृ शक्ति पर प्रहार हो रहे हैं, मातृ शक्ति लुटा रही है और लोग अंधी दौड़ और होड़ में एक भी पल शगुन का जीवन नहीं जी रहे हैं, लोग दर्द से छटपटा रहे हैं, तनाव से भरे हुए हैं, शिकायतों से भरे हुए हैं, आलोचनाओं से भरे हुए हैं और बीमारियों से घिरे हुए हैं।

मैं ऐसे लोगों को जीवन दूंगा, सपना दूंगा, खुशियां दूंगा, हौसला दूंगा, जज्बात दूंगा, जीन की राह दूंगा, रोशनी दूंगा, स्वास्थ्य दूंगा और सुख-शांति-शगुन का जीवन दूंगा और ये सब मैं तब दे पाऊंगा जब मैं ऐसा जीवन जीऊंगा, जब मैं खुश रहूंगा, जब मैं हौसलों में ऊडूंगा, जब मैं रोशन रहूंगा, जब मैं स्वस्थ रहूंगा, जब मैं स्वस्थ-सुख-शांति से रहूंगा और पहले आदर्श का जीवन जीऊंगा। इसके बाद मनीष ने कुछ बनने का सपना छोड़ दिया और करने का सपना अपने मन मस्तिष्क में रचा-बसा लिया।

उसने धीरे-धीरे सच्चाई, सरलता, मेहनत और ईमानदारी से अपने मिशन को आगे बढ़ाना शुरू किया। विद्यार्थियों को, युवाओं को और लोगों को जाग्रत करना शुरू किया और देखते ही देखते उसका मिशन खुशियों के रंग बिखरने लगा। असंख्य लोगों को जीने की राह मिली जीने का उद्देश्य मिला और यौं कहे कि जीने के लिए एक सम्पूर्ण जीवन मिलने लगा।

प्रेरणा बिन्दु:-
जब कोई इच्छा प्रबलता से अभिव्यक्त होती है, व्यवहार में अमल में लाई जाती है तो बहुत शक्ति बन जाती है और शक्ति से अपना साकार होता है।

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