बच्चे भी सम्मान के हकदार हैं

0
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

आज दुनिया तेजी से बदल रही है और इस तेजी से दुनिया बदलने का कारण भौतिक सम्पति, सुविधाएं और एक दूसरे से जबरदस्त हौड़ प्रमुख कारणों में से हैं। इन सब कारणों का नकारात्मक प्रभाव मासूम से बच्चों पर सीधा पड़ता है। आज किसी भी मां-बाप के पास अपने बच्चों को देने के लिए सुविधाएं है लेपटॉप है, टेबलेट है, टीवी-कम्प्यूटर है, सोशल मीडिया है, खाने-पीने के लिए फास्ट-फूड है, पहनने के लिए शॉर्ट शर्ट और कटी-फटी जीन्स है, चबाने के लिए जर्दा-सुपारी है, मोबाइल-मोटरसाइकिल है, इंटरनेट की दुनिया है और क्रिकेट की दुनिया सहित और भी न जाने क्या-क्या है।

लेकिन आज के बच्चों के पास दादी-नानी के गीत नहीं है, बाग-बगीचे, नदी-नाले-झरने-कुएं-बावड़ी के किस्से नहीं हैं, पेड़-पर्वत-पवन-पानी की बाते नहीं है, भारत मां, मां सीता, गायत्री, युग पुरूषों की यादें नहीं है, हौसले-जज्बात और हिम्मत का वातावरण नहीं है, लाड-प्यार-दुलार और वात्सल्य के लिए समय नहीं है, दिल में उतरने और गले लगने के आनंद का भाव नहीं है।

इन सबके लिए बच्चे जिम्मेदार नहीं है, घर, समाज और इनका वातावरण जिम्मेदार है। बच्चे होने का मतलब डाट खाते रहना नहीं है, बच्चे होने का मतलब गंदी बातें सुनना नहीं है, बच्चे होने का मतलब उपेक्षा करना नहीं है, बच्चे होने का मतलब जब चाहे चुप कर देना नहीं है और बच्चे होने का मतलब हाथ उठाना उन्हें बेरहमी से पीटना और उनका शोषण करना नहीं है। बच्चे होने का असली मतलब तो अपने बच्चों को अपने स्वयं के जैसा ही प्रेम करना है, अपने स्वयं को सम्मान देना जैसा ही है, अपने स्वयं को न्याय देना जैसा ही है।

आज अगर देखा जाए तो वास्तविक विरासत और देश का भविष्य तो बच्चे ही हैं। यदि बच्चों में वात्सल्य, प्रेम, दया, परोपकार और अन्य मानवीय गुणों का बीजारोपण नहीं किया गया, उनको आदर-सम्मान और महत्व नहीं दिया गया तो यह निश्चित है कि वे भी किसी को सम्मान और प्रेम देने वाले नहीं बनेंगे, अच्छी आदतों वाले नहीं बनेंगे, मधुर भाषा बोलने वाले नहीं बनेंगे, जुझारू और हिम्मत वाले नहीं बनेंगे, समाज और देश का उत्थान करने वाले नहीं बनेंगे, दूसरों का भला करने वाले नहीं बनेंगे और सबसे बड़ी बात है कि वे माता-पिता और बुजुर्गों के हित की सोचने वाले नहीं बनेंगे। इसका सीधा सा मतलब है कि बच्चों को छोटे समझ कर उनका अनादर और तिरस्कार नहीं करें बल्कि उनको सम्मान और प्यार दें।

प्रेरणा बिन्दु:-
व्यक्ति का यह भूलना कि मैं भी कभी बच्चा था, समाज के पतन की असली कहानी है क्योंकि बच्चों की संवेदनाओं को केवल बच्चे जैसे बनकर ही समझा जा सकता है।

Source link

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

You might also like More from author

Comments

Loading...
%d bloggers like this: