कश्मीर राजमार्ग छह दिनों से फंसे हैं 5000 से अधिक वाहन

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श्रीनगर। पिछले सप्ताह हुई बारिश, हिमपात तथा भूस्खलन के कारण 300 किलोमीटर लंबे श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर छह दिनों से पांच हजार से अधिक वाहन विभिन्न जगहों पर फंसे हुए हैं। राजमार्ग बंद होने कश्मीर घाटी का संपर्क छह दिनों से देश के बाकी हिस्सों से कटा हुआ है। राजमार्ग बंद होने की वजह से घाटी में जरूरी सामानों विशेष कर सब्जियों, चिकन तथा मांस की भारी कमी हो गयी है तथा स्थानीय सब्जियों के दाम में भारी बढ़ोतरी हो गयी है।

उधर, दक्षिण कश्मीर में शोपियां को जम्मू क्षेत्र के राजौरी तथा पुंछ को जोड़ने वाली 86 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक मुगल रोड कई फुट बर्फ जमा होने के कारण गत दिसंबर महीने से बंद है। इसी तरह से 434 किलोमीटर लंबा श्रीनगर -लेह राष्ट्रीय राजमार्ग भी बंद है और सोमवार सुबह तक लद्दाख क्षेत्र को कश्मीर से जोड़ने वाले इस राजमार्ग की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।

सभी मौसम में कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले इस राजमार्ग के विभिन्न जगहों पर पांच हजार से अधिक वाहन फंसे हुए है, जिसमें अधिकतर ट्रक और तेल के टैंकर हैं। यातायात पुलिस के अधिकारी ने सोमवार को यूनीवार्ता को बताया कि राजमार्ग पर फंसे वाहनों के निकालने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि भूस्खलन तथा राजमार्ग पर गिरी चट्टानों के मलबे को हटाने के बाद रविवार को दोपहर बाद हमने जरूरी सामानों से लद ट्रकों को उधमपुर से कश्मीर की ओर जाने की इजाजत दी थी लेकिन जब वाहन कश्मीर की ओर बढ़ रहे थे, तो रामबन तथा रामसू में भूस्खलन तथा पर्वतों से चट्टान गिर गई। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा सीमा सड़क संगठन ने मलबे तथा चट्टानों को हटाने का काम शुरू कर दिया।

राजमार्ग की मरम्मत का काम विशेष रूप से अपराह्न में जारी है। उन्होंने बताया कि पहले फंसे हुए वाहनों विशेष रूप से ट्रकों को कश्मीर की ओर जाने की इजाजत दी जाएगी।उन्होंने कहा कि नए वाहनों के परिचालन की इजाजत राजमार्ग पर फंसे हुए वाहनों के निकल जाने के बाद ही दी जाएगी। राजमार्ग पुलिस के अधीक्षक ने कहा कि श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति के बारे में कोई अनुमान नहीं लगा सकता है।

उन्होंने कहा कि कोई यह नहीं कह सकता है कि राजमार्ग पर विशेषकर रामबन तथा रामसू में भू्स्खलन तथा चट्टान गिरने की घटनाएं कब होगी? उन्होंने उन्होंने कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण तथा सीमा सड़क संगठन 24 घंटे राजमार्ग को खोलने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने बताया कि राजमार्ग पर लगातार चट्टानों के गिरने और भूस्खलन को देखते हुए अधिकारी राजमार्ग पर यातायात बहाल नहीं करने के लिए मजबूर है क्योंकि यह खतरनाक हो सकता है।

हाल ही में चट्टान खिसकने वाले क्षेत्र में पैदल यात्रा की कोशिश करने वाले दो लोगों की मौत हो गयी थी तथा तीन अन्य लोग घायल हो गए थे। आधिकारिक सूत्रों ने यूनीवार्ता को बताया कि तीन हजार से अधिक वाहन जिसमें अधिकतर कश्मीर घाटी के हैं ,उधमपुर तथा अन्य जगहों पर राजमार्ग पर फंसे हुए हैं। इसी तरह से दो हजार से अधिक ट्रक जिसमें फल से लदे ट्रक तथा तेल के टैंकर शामिल है काजीगुंड सहित जवाहर सुरंग की ओर फंसे हुए हैं।

स्थानीय निवासी काजीगुंड तथा जवाहर सुरंग के दूसरी ओर फंसे ट्रकों के चालकों तथा यात्रियों को भोजन तथा पानी मुहैया करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि रामबन में भारी संख्या में यात्री फंसे हुए हैं। जिला प्रशासन ने अब फंसे हुए यात्रियों को एक स्थानीय विद्यालय में ठहरने की व्यवस्था की है। फंसे हुए यात्रियों जिसमें महिलाएं एवं बच्चे भी शामिल हैं, को भोजन मुहैया कराया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि जवाहर सुरंग, बनिहाल तथा पटनीटॉप सहित कई जगहों पर सड़क पर फिसलन है। सूत्रों के मुताबिक रामबन में एक वाहन के पलट जाने के कारण कुछ लोग आज घायल हो गए।

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