अपनी बात सही तरीके से रखना सीखें

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प्रभु ने व्यक्ति को दो अनमोल उपहार दिए हैं जिनमें से प्रथम है वाणी और दूसरा है मस्तिष्क की सोचने की क्षमता। इन दोनों ही विशेषताओं से व्यक्ति इस सृष्टि के अन्य प्राणियों से अलग है, विशेष है। लेकिन यह भी देखने में बहुत आता है कि व्यक्ति इन दोनों विशेषताओं को नजरअंदाज कर देता है, इनकी असली शक्ति, वास्तविक महत्व समझ नहीं पाता है और इनका सही उपयोग नहीं कर पाता है और यही कारण है कि वह बहुत पीछे हो जाता है।

श्रीप्रभु के द्वारा मस्तिष्क के रूप में दुनिया की सबसे पावरफुल मशीन केवल इसीलिए मिली है कि व्यक्ति इसे सोच-समझकर काम में ले, अच्छे कामों में उपयोग लेना, सार्थक कामों में उपयोग लेना और देश हित के कामों में उपयोग लेना ही इसका असली मकसद है, अन्यथा तो इसका कोई मतलब नहीं रह जाएगा। दूसरा जो उपहार श्रीप्रभु ने मनुष्य को दिया है उसे वाणी कहते हैं। व्यक्ति का अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त माध्यम है। अपनी वाणी ही से उसकी प्रथमस: पहचान होती है, वाणी से ही उसके वास्तविक जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में सही जानकारी मिलती है। यदि उसकी वाणी ही में गड़बड़ है, छोटापन है, ओच्छा पन है, तीखापन है और कर्कशता है तो फिर उसका जीवन भी ऐसा ही होगा इससे एक अनुमान लग जाता है।

दूसरे शब्दों में व्यक्ति ज्ञान का भण्डार हो सकता है, बहुत विद्वान हो सकता है, धनवान और गुणवान हो सकता है लेकिन इन सबके बावजूद यदि वह अपनी बात को, अपने ज्ञान को, अपनी कला को और अपने पक्ष को स्पष्ट तरीके से, सौम्यता के साथ, अच्छे से रखता है तो सब उसकी बात को बहुत अच्छे से समझ पाएंगे। ग्रहण कर पाएंगे और सीख पाएंगे। व्यक्ति के पास सब कुछ हो, लेकिन यदि बोलने की कला नहीं हो, अपनी बात को सही तरीके से रखने की कला नहीं हो, बात तो कहने का सलीका नहीं हो तो फिर ऐसे व्यक्ति का ज्ञान किसी भी काम में नहीं आएगा, किसी को योग्य नहीं बना पाएगा, किसी का कामयाबी में मदद नहीं कर पाएगा और मात्र औपचारिक रह जाएगा।

आपकी बात रखने की कला ही आपकी असली पहचान है। अपनी बात रखने के लिए सरलता चाहिए, ईमानदारी चाहिए, निडरता चाहिए, स्पष्टता चाहिए और जब ये सब चीजें होती हैं तो आपकी बातों का, आपके भावों, आपके विचारों का और आपके ज्ञान का बहुत प्रभाव पड़ेगा। कभी-कभी अपनी बात को सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाने से आपकी वास्तविक योग्यता का पता नहीं चल पाता है, आपके व्यक्तित्व का मूल्यांकन नहीं हो पाता है, आपका कृतित्व लोगों के सामने नहीं आ पाता है और ऐसा होने से आपको वह सम्मान नहीं मिल पाता है जो सम्मान आपको मिलना चाहिए था।

इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए अपनी बात किसी जानकार के सामने, अनजान के सामने, घर वालों के सामने, किसी कार्यक्रम में, स्टेज पर या फिर अन्य किसी भी जगह अपने साथ न्याय कीजिए और न्याय का आपका सच्चा कर्म, आपका सरल कर्म, आपका अच्छा व्यवहार, ईमानदार आचरण होता है और इन सबको व्यक्त करने के लिए आपकी मधुर-सशक्त बात जरूरी है तभी आप अपने साथ न्याय कर पाएंगे और उभर कर सबके सामने आएंगे।

प्रेरणा बिन्दु:-
हो सकता है आपको बोलना अच्छा आता है लेकिन बात करना आना एक अलग तथ्य है क्योंकि अपनी भावना को सही तरीके से रखना ही आपका व्यक्तित्व और कृतित्व है।

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