आज बजट , मध्यम वर्ग और किसानों पर मेहरबान हो सकती है मोदी सरकार

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नई दिल्ली। वित्त मंत्री पीयूष गोयल शुक्रवार को जब लोकसभा में वित्त वर्ष 2019-20 के लिए अंतरिम बजट पेश करेंगे, तो उनके लिए लोकलुभावन घोषणाओं की आस और राजकोषीय अनुशासन के बीच संतुलन साधना रस्सी पर चलने जैसा होगा। मोदी सरकार का यह अंतिम बजट है। इसलिए गोयल इस मौके का इस्तेमाल लोकसभा चुनाव से पहले मध्यम वर्ग, किसान और नौजवानों को रिझाने और सरकार की उपलब्धियों का बखान करने के लिए कर सकते हैं। व्यक्तिगत करदाताओं को टैक्स राहत और किसानों और गरीबों को न्यूनतम आय (यूनिवर्सल बेसिक इनकम) के विकल्प सरकार की मेज पर हैं। अंतरिम बजट में इस आशय की घोषणा के आसार हैं। हालांकि, इन लोकलुभावन घोषणाओं का स्वरूप खजाने की स्थिति से तय होगा। यह पहला मौका होगा जब गोयल बजट पेश करेंगे। उन्होंने 23 जनवरी को ही अंतरिम वित्त मंत्री के तौर पर वित्त मंत्रालय का पदभार संभाला है। सूत्रों के मुताबिक, अंतरिम बजट 2019-20 का आकार लगभग 27 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है। इसमें व्यक्तिगत करदाताओं को आयकर में छूट, कृषि क्षेत्र को संकट से उबारने के लिए राहत पैकेज और छोटे व्यापारियों के लिए विशेष सुविधाओं की घोषणा की जा सकती है।वैसे तो यह अंतरिम बजट होगा, क्योंकि पूरे वित्त वर्ष के लिए नियमित बजट अगली सरकार पेश करेगी। लेकिन, माना जा रहा है कि गोयल लीक से हटकर कुछ घोषणाएं कर सकते हैं। वह ग्रामीण क्षेत्रों का संकट दूर करने के लिए किसानों के बैंक खाते में सीधे नकदी डालने की योजना का एलान कर सकते हैं। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इससे सरकार के खजाने पर कितना बोझ पड़ेगा। एक अनुमान के मुताबिक, कृषि पैकेज से सरकार के खजाने पर 70 हजार से एक लाख करोड़ रुपये तक बोझ पड़ सकता है। इस संबंध में सरकार तेलंगाना के रायथू बंधु और ओडिशा के कलिया मॉडल पर विचार कर रही है। ब्याज मुक्त ऋण और जीरो प्रीमियम पर फसल बीमा की सुविधा देने पर भी विचार किया जा रहा है। इसी तरह व्यापारियों के लिए भी सस्ते ऋण की सुविधा देने की संभावनाओं पर विचार किया गया है। राजकोषीय स्थिति पर निर्भर करेंगी लोकलुभावन घोषणाएं सरकार की लोकलुभावन घोषणाएं राजकोषीय स्थिति पर निर्भर करेंगी। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 3.3 प्रतिशत रखा है और माना जा रहा है कि संशोधित अनुमानों में यह लक्ष्य से ऊपर जा सकता है। इसी तरह अगले वित्त वर्ष में भी यह अनुमान से कहीं अधिक हो सकता है।पहली बार जीएसटी का मासिक संग्रह एक लाख करोड़ रुपये जीएसटी के मोर्चे पर सरकार के लिए राहत की एक खबर यह है कि कई महीने बाद जनवरी 2019 में पहली बार जीएसटी का मासिक संग्रह एक लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। इस बात की संभावना है कि सरकार रिजर्व बैंक से अधिक अंतरिम डिविडेंड की मांग कर सकती है।आयकर छूट की सीमा बढ़ाने का हो सकता है एलान -उम्मीद की जा रही है कि गोयल आयकर से छूट की मौजूदा सीमा ढाई लाख रुपये को बढ़ाकर तीन लाख रुपये कर सकते हैं।-60 से 80 वर्ष के करदाताओं के लिए आयकर छूट की सीमा तीन लाख से बढ़ाकर साढ़े तीन लाख रुपये की जा सकती है। -महिला करदाताओं के लिए आयकर से छूट की सीमा भी सवा तीन लाख रुपये करने का एलान किया जा सकता है।-आयकर कानून की धारा 80-सी के तहत कर छूट की सीमा भी मौजूदा डेढ़ लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये की जा सकती है। -काउंसिल लोन के ब्याज के संबंध में मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को दो लाख रुपये से बढ़ाकर ढाई लाख रुपये किया जा सकता है।

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