अयोध्या विवाद पर केंद्र सरकार ने बड़ा दांव चला, SC में जमीन लौटाने की अर्जी

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नई दिल्ली। अयोध्या मामले में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हिन्दू पक्षकारों की भूमि रामजन्मभूमि न्यास को देने का आदेश दें।भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर कहा कि राम जन्मभूमि मामले में केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। राम जन्मभूमि विवाद मामले में केंद्र सरकार ने बड़ा दांव चला है। केंद्र इस केस में आज सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। सरकार ने अयोध्या विवाद मामले में विवादित जमीन छोड़कर बाकी जमीन को लौटने की मांग की है और इस पर जारी यथास्थिति हटाने की मांग की है। सरकार ने अपनी अर्जी में 67 एकड़ जमीन में से कुछ हिस्सा सौंपने की अर्जी दी है। सरकार के इस कदम का हिंदूवादी संगठनों ने स्वागत किया है। 1993 में केंद्र सरकार ने अयोध्या अधिग्रहण ऐक्ट के तहत विवादित स्थल और आसपास की जमीन का अधिग्रहण कर लिया था और पहले से जमीन विवाद को लेकर दाखिल तमाम याचिकाओं को खत्म कर दिया था। सरकार के इस ऐक्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने इस्माइल फारुखी जजमेंट में 1994 में तमाम दावेदारी वाले सूट (अर्जी) को बहाल कर दिया था और जमीन केंद्र सरकार के पास ही रखने को कहा था और निर्देश दिया था कि जिसके फेवर में अदालत का फैसला आता है, जमीन उसे दी जाएगी। कोर्ट में पहले से मामला अयोध्या जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर सुनवाई टल गई है। इसके पीछे 5 जजों की बेंच में जस्टिस एसए बोबडे की गैर-मौजूदगी वजह बताई जा रही है। इस मामले की सुनवाई 29 जनवरी से शुरू होने वाली थी। हालांकि, सुनवाई की अभी नई तारीख के बारे में कोई सूचना नहीं है। जस्टिस एसए बोबेड को कुछ दिन पहले ही इस बेंच में शामिल किया गया था। 5 जजों की इस बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोवडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अब्दुल नजीर हैं। बता दें, सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या 2.77 एकड़ भूमि विवाद से संबंधित मामले में 14 अपीलें दायर की गई है। यह सभी अपील 30 सितंबर, 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2:1 के बहुमत के फैसले के खिलाफ है। इस फैसले में हाईकोर्ट ने विवादित भूमि को भूमि सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान के बीच बराबर- बराबर बांटने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मई, 2011 को स्टे का ऑर्डर दिया था। इसके बाद पिछले दिनों मामले की सुनवाई के लिए पांच जजों की बेंच का गठन किया गया था। इस बेंच में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा अलावा जज जस्टिस एसए बोवडे, जस्टिस एनवी रमन्ना, जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल थे।

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