13 प्वाइंट रोस्टर पर फंस गई है सरकार, इस फैसले को पलटने के लिए संविधान में संशोधन की मांग

0
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.


देश के विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी वर्ग को आरक्षण देने के लिए नए नियम 13 प्वाइंट रोस्टर लागू करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सही ठहराए जाने को लेकर विरोध शुरू हो गया है. सर्वोच्च न्यायलय के इस फैसले को आरक्षण के सिद्धांत के खिलाफ बताते हुए केंद्र सरकार के सहयोगी दल समेत तमाम विपक्षी दल सरकार से इस फैसले को पलटने के लिए संविधान में संशोधन की मांग कर रहे हैं. केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए 200 प्वाइंट रोस्टर को खारिज कर 13 प्वाइंट रोस्टर लागू करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप से इनकार करने के फैसले से दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलत राम कॉलेज में एडहॉक पर पढ़ा रहीं नीतिशा खलको निराश हैं. वह कहती हैं, ‘कितनी मुश्किलों में मैंने झारखंड से आकर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से हिंदी विषय में पीएचडी की, और अब डीयू में एडहॉक पद पर पढ़ा रही हूं. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हमारी उम्मीद खत्म हो गई है.’ वह कहती हैं, ‘एक तो विश्वविद्यालयों में नौकरियों के लिए विज्ञापन नहीं निकलते हैं और अगर 13 प्वाइंट रोस्टर के हिसाब से विज्ञापन आएंगे भी, तो अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों की नियुक्ति संभव नहीं है. क्योंकि इस रोस्टर के दायरे में वे कभी आ ही नहीं पाएंगे.’ किस बात से डर रहे हैं ST/SC/OBC वर्ग के छात्र? देश के विश्वविद्यालयो में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए 200 प्वाइंट रोस्टर के तहत आरक्षण की व्यवस्था थी. इस व्यवस्था के तहत विश्वविद्यालय को एक यूनिट माना जाता था. जिसके तहत 1 से 200 पद के लिए 49.5 फीसदी आरक्षित वर्ग और 50.5 फीसदी अनारक्षित वर्ग के हिसाब से भर्ती की व्यवस्था की गई थी. यूनिवर्सिटी को एक यूनिट मानने से सभी वर्ग के उम्मीदवारों की भागिदारी सुनिश्चित हो पाती थी. लेकिन नए नियम यानी 13 प्वाइंट रोस्टर के तहत विश्वविद्यालय को यूनिट मानने के बजाय विभाग को यूनिट माना गया. जिसके तहत पहला, दूसरा और तीसरा पद सामान्य वर्ग के लिए रखा गया है. जबकि चौथा पद ओबीसी कैटेगरी के लिए, पांचवां और छठां पद सामान्य वर्ग. इसके बाद 7वां पद अनुसूचित जाति के लिए, 8वां पद ओबीसी, फिर 9वां, 10वां, 11वां पद फिर सामान्य वर्ग के लिए. 12वां पद ओबीसी के लिए, 13वां फिर सामान्य के लिए और 14वां पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होगा. नितिशा खलको कहती हैं कि 13 प्वाइंट रोस्टर के लागू होने की स्थिति में आदिवासी छात्रों के लिए कभी मौका ही नहीं मिल पाएगा. क्योंकि किसी भी विभाग में इतने पैमाने पर नौकरियों के लिए अधिसूचना जारी नहीं होती है. 14वें नंबर तक आते-आते अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण निष्क्रिय हो जाता है. इसे क्रमवार बताते हुए उन्होंने कहा कि विभाग को यूनिट मानने पर कभी भी एक साथ 14 पद आएंगे यह मुमकिन नहीं लगता है. उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, जनजाति के लिए एक पद भी नहीं मिल पाएगा. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय और हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्लय जैसे तमाम विश्वविद्यालयों में कितने ऐसे विभाग हैं जिनमें मात्र एक या दो या अंतिम 3 प्रोफेसर ही विभाग को संचालित करते हैं. वहां पर कभी भी ST/SC/OBC की नियुक्ति नहीं हो पाएगी. नीतिशा ने बताया कि अमूमन किसी भी विभाग में 1 या 2 या 3 पद निकलते हैं. इस स्थिति में सबसे पहले अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार की उम्मीद खत्म हो जाती है. उसके बाद अनुसूचि जाति और फिर उसके बाद अन्य पिछड़ा वर्ग की. बहुजन साहित्य संघ की उपाध्यक्ष और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शोध कर रहीं कनकलता यादव पूछती हैं कि विभाग को यूनिट मानने के बाद कितने साल बाद अनुसूचित जनजाति का नंबर आएगा? फिर अनुसूचित जाति का नंबर आएगा, फिर ओबीसी का नंबर आएगा? इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है. 200 प्वाइंट रोस्टर से पहले 13 प्वाइंट रोस्टर था. इसी कारण OBC, SC, ST प्रोफेसरों की नियुक्ति नहीं हो पाती थी. उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सबसे पहले सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में 2015 में यही 13 प्वाइंट रोस्टर लागू किया था जिस कारण 84 असिस्टेंट प्रोफेसर में ST-SC का एक भी पद नहीं आया था. OBC का एक मात्र पद आया था. 200 प्वाइंट रोस्टर के पक्ष में दलील दिल्ली विश्वविद्याल के श्याम लाल कॉलेज में इतिहास विभाग में पढ़ा रहे जितेंद्र कुमार मीणा कहते हैं कि 200 प्वाइंट रोस्टर और 13 प्वाइंट रोस्टर में ध्यान देने वाली बात यह है कि 13 प्वाइंट रोस्टर में 14 नंबर के बाद फिर 1,2,3,4 शुरू हो जाता है. जो 14 नंबर पर जाकर पुनः समाप्त हो जाता है. जबकि 200 प्वाइंट रोस्टर में 1 नंबर से पद शुरू होकर 200 नंबर तक जाता है. इस 200 नंबर के बाद फिर 1,2,3,4,5,6,7 से क्रम शुरू होता है और 200 नंबर तक जाता है. इस स्थिति में अनिवार्य रूप से ST, SC, OBC का पद क्रम आता है. मीणा ने कहा, ‘इस 200 प्वाइंट रोस्टर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और किसी भी विश्वविद्यालय को अनिवार्य रूप से यूनिवर्सिटी को यूनिट मानना पड़ता है. इस स्थिति में ST, SC, OBC के साथ लोकतांत्रिक, सामाजिक और संवैधानिक न्याय होता है. हमें इसी 200 प्वाइंट रोस्टर के लिए तब तक लड़ना है जब तक इसे इस देश सभी विश्वविद्यालयों में लागू न कर दिया जाए.’ कब शुरू हुआ रोस्टर का विवाद? रोस्टर का विवाद पहली बार 2006 में सामने आया था. उस समय केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षण के तहत नियुक्तियों के सवाल के समाधान के लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली तत्कालीन यूपीए सरकार के डीओपीटी मंत्रलाय ने 2005 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को पत्र भेजकर यूनिवर्सिटी में आरक्षण लागू करने की खामियों को दूर करने का निर्देश दिया. तब यूजीसी के तत्कालीन चेयरमैन प्रोफेसर वीएन राजशेखरन पिल्लई ने प्रोफेसर रावसाहब काले की अध्यक्षता में आरक्षण को लेकर एक फॉर्मूला बनाने के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी में कानूनविद प्रोफेसर जोश वर्गीज और यूजीसी के तत्कालीन सचिव डॉ. आर के चौहान शामिल थे. प्रोफेसर काले कमेटी ने डीओपीटी मंत्रालय के 02 जुलाई 1997 के दिशानिर्देश को, जो कि उच्चतम न्यायालय के सब्बरवाल जजमेंट के आधार पर तैयार हुआ है, को आधार मानते हुए 200 प्वाइंट का रोस्टर बनाया. इसमें किसी विश्वविद्यालय के सभी विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर का तीन स्तर पर कैडर बनाने की अनुशंसा की गई. कमेटी ने विभाग की बजाय विश्वविद्यालय, कॉलेज को यूनिट मानकर आरक्षण लागू करने की सिफारिश की, क्योंकि उक्त पदों पर नियुक्तियां विश्वविद्यालय करता है, न कि उसका विभाग. इसी 200 प्वाइंट रोस्टर को बीएचयू के छात्र विवेकानंद तिवारी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में में चुनौती दी. हाईकोर्ट ने 200 प्वाइंट की बजाय 13 प्वाइंट रोस्टर को विश्वविद्यालयों में लागू करने का फैसला सुनाया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि आरक्षण विभाग को ईकाई मानकर दिया जाए. इसके लिए 13 प्वाइंट का रोस्टर बना. इसके तहत चौथा पद ओबीसी को, सातवां पद अनुसूचित जाति को, आठवां पद ओबीसी के लिए निर्धारित है. 14वां पद अगर विभाग में आता है, तभी वह अनुसूचित जनजाति को मिलेगा. इनके अलावा सभी पद अनारक्षित घोषित कर दिए गए. अगर 13 प्वाइंट के रोस्टर के तहत आरक्षण को लागू कर भी दिया जाए तो भी असल आरक्षण 30% के आसपास ही रह जाएगा, लेकिन फिलहाल केंद्र सरकार की नौकरियों में एससी-एसटी-ओबीसी के लिए 49.5 फीसदी आरक्षण का प्रावधान है.

Source link

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

You might also like More from author

Comments

Loading...
%d bloggers like this: