दूध माफियाओं का सच उजागर करने पर दी जान से मारने की धमकी …

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पलवल/विक्रम वशिष्ठ (फरीदाबाद)

हरियाणा व राजस्थान में नकली व मिलावटी दूध बेचने वाले माफियाओं के खिलाफ मोर्चा खोलना फरीदाबाद के कांग्रेसी नेता एवं उनकी टीम को उस समय भारी पड़ा, जब भरतपुर पुलिस ने उन पर झूठा मुकदमा दर्ज कर उन्हें दो दिनों तक थाने में बंधक बनाकर अमानवीय रुप से प्रताडि़त किया।  इतना ही नहीं पुलिस कर्मियों ने उनसे कैमरे, नगदी व अन्य जरुरी कागजात भी छीन लिए और जान से मारने की धमकी दी और उन्हें कुख्यात अपराधियों की तरह यातनाएं भी दी गई। बाद में कांग्रेसी नेता व उनकी टीम को बड़े प्रयासों के बाद जमानत मिली।

अब उन्होंने दूध माफियाओं की पोल खोलने और इस गोरखधंधे में संलिप्त पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों को बेनकाब करके उनके खिलाफ कार्यवाही करने का बीड़ा उठाते हुए इस बाबत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, डीजीपी हरियाणा, डीजीपी राजस्थान सहित उच्चाधिकारियों को शिकायत पत्र भेज कार्यवाही किए जाने की मांग की है। वहीं पुलिस कर्मियों द्वारा किए गए अमानवीय व्यवहार को लेकर मानव अधिकार आयोग में भी शिकायत भेजी है। फरीदाबाद के एन.एच.-5 में  रहने वाले कांग्रेसी नेता संजय शर्मा एंटी क्रप्शन ब्यूरो कमिश्रर ऑफ इंडिया नामक एनजीओ चलाते है। संजय शर्मा ने बताया कि उन्हें पिछले दिनों सूचना मिली कि हरियाणा के पुन्हाना, जुरहैरा, कामा जिला भरतपुर, राजस्थान में नकली दूध का कारोबार फलफूल रहा है और कुछ स्वार्थी लोग लालच के चलते दूध में मिलावट करके लोगों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे है।

सूचना प्राप्त होने के बाद वह अपनी एनजीओ टीम के साथ जुरहैरा के सरकारी अस्पताल में पहुंचे और सर्वे करने पर पाया कि वहां सरकारी अस्पताल में तैनात डाक्टर डा. शुक्ला न केवल अस्पताल की दवाईयां बेच देता है वहीं डेयरियों में आने वाले दूध का बिना सैम्पल जांच किए मिलीभगत करके उन्हें पास करता है। यहां हर माह करोड़ों रुपये का दूध का कारोबार किया जा रहा है। इतना ही नहीं बल्कि जांच के नाम पर राहुल डेयरी, आत्म डेयरी, पुन्हाना, व दुर्गे डेयरी जुरहैडा पर महीने में एक बार ही फूड इंस्पेक्टर आता है, वह भी सुविधा शुल्क लेकर दूध को बिना चैक किए चला जाता है। सर्वे में पाया कि इन डेयरियों पर किसी प्रकार का को लाईसेंस नहीं था और न ही किसी लैब से इनके दूध की जांच होती है। संजय शर्मा व उनकी टीम ने इस पूरे गोरखधंधे की सबूतों सहित सर्वे करने के बाद जब संबंधित पुलिस थाने में इसकी शिकायत करते हुए इन डेयरी संचालकों के खिलाफ कार्यवाही की शिकायत की तो थाने में तैनात पुलिस कर्मियों ने दूध माफियाओं के साथ मिलकर कोई कार्यवाही नहीं की। इतना ही नहीं उन्होंने वहां के एसएचओ, डीएसपी व एसएसपी को इस पूरे स्कैम के बारे में बताया तो उन्होंने कार्यवाही करना तो दूर उन्हें ही धमकाते हुए चुपचाप वापिस चले जाने की नसीहत दे डाली। परंतु जब उनकी टीम इस स्कैम के खिलाफ कार्यवाही करने पर अड़ी रही तो पुलिस कर्मियों ने आनन-फानन में डेयरी वालों से मोटा शुल्क लेकर उनके खिलाफ ही 107-51 में झूठा मुकदमा दर्ज करके उन्हें पकड़ लिया और उनसे नगदी, कैमरे, मोबाइल व अन्य सबूत भी छीन लिए। इसके बाद उन्हें दो दिनों तक थाने में बंद रखा और रात के समय अमानवीय यातनाएं दी और बाद में उन्हें जेल भेज दिया। उनकी परेशानियां यही खत्म नहीं हुई बल्कि मामूली सी धारा में झूठे मुकदमें में जमानत के लिए भी उन्हें तहसीलदार मधुसूदन शर्मा ने हैसियतनामे के नाम पर उन्हें कई दिनों तक परेशान किया और हैसियतनामा पहले दिन लगाने के बावजूद भी उन्हें 6 दिन बाद जमानत मंजूर की।

सच्चाई का पर्दाफाश करने के आरोप में 6 दिन जेल में बिताकर बड़े प्रयासों के बाद वह और उनकी टीम जेल से बाहर आई और थाने में जमा सामान लेने पर भी पुलिसकर्मियों ने उनसे न केवल रुपये लिए बल्कि धमकी देते हुए अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया। संजय शर्मा ने कहा कि दूध के नाम पर ये डेयरी वाले लोगों को जहर बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे है और इस पूरे प्रकरण में पुलिस व प्रशासन में उनकी पूरी सांठगांठ है, जिसके चलते उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं करता और जेल से आने के बाद भी उन्हें फोन पर जान से मारने की धमकियां दी जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री, डीजीपी हरियाणा, डीजीपी विजिलेंस, डीजीपी राजस्थान को शिकायत पत्र भेजते हुए डेयरी संचालकों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने, उन्हें व उनकी टीम को सुरक्षा मुहैया करवाने व पुलिस महकमे में व्याप्त भ्रष्टाचार और इस प्रकरण में दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। संजय शर्मा ने सरकार व प्रशासन को चेताते हुए कहा कि अगर इन माफियाओं व पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं की गई तो वह दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन करने से भी गुरेज नहीं करेंगे। 

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