सरस्वती महिला महाविधालय मे ‘युवा ही बदलेंगे भारत की तस्वीर’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता

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पलवल/विक्रम वशिष्ठ 

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् पलवल जिला ईकाई के तत्वाधान मे जिले के सरस्वती महिला महाविधालय, एस डी महाविधालय और राजकीय महाविद्यालय मे स्वामी विवेकानंद जन्मोत्सव को युवा दिवस के उपलक्ष्य मे मनाया गया | सरस्वती महिला महाविधालय मे ‘युवा ही बदलेंगे भारत की तस्वीर’ विषय पर भाषण प्रतियोगिता करायी गई | जिसमे महाविधालय की छात्राओ ने बढ़ चढ़कर भाग लिया |

इस अवसर मुख्य अतिथि अभाविप के प्रदेश मीडिया सहप्रमुख पारिजात पांडेय, मुख्य वक्ता जिला संयोजक योगेश कौशिक रहे व कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविधालय प्रर्चाया श्रीमति शशी जी ने की | योगेश कौशिक ने संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद उच्च परिवार के थे फिर भी उन्होनें देश को गुलामी से आजाद करवाने के लिए घर का त्याग कर संन्यासी के रूप मे जीवन जीने का निर्णय लिया | वे देश के गरीबो, पीडितों के विकास के लिए चिंतन करते थे | गुरू परमहंस उनके प्रश्न का जबाब पूरी सतुंषटी से देते थे जिसके कारण स्वामी विवेकानंद गुरू परमहंस के विचारो से प्रभावित हुए और कन्याकुमारी स्थित शिलालेख पर देश के बारे मे चितंन किया और अपना जीवन देश के युवाओ को देश के प्रति जगाने मे बिताने का फैसला लिया | उन्होने पूरे देश मे घूमकर एक सामाजिक अनुभूति की और देखा की किस प्रकार देश के लोग गुलामी मे जकड़े हुए हैं फिर देश विभिन्न भागों में जाकर युवाओ को जागरूक किया उसके बाद 11 सितंबर 1893 को अमेरिका के शिकागो मे आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए भारत की संस्कृति, सनातन धर्म, अध्यात्मिक शक्ति, कला और संगीत का अनुसरण करवाया | और पूरे विश्व को बताया था कि भारत विश्वगुरू था और विश्वगुरू रहेगा, उसके बाद सम्मेलन मे उपस्थित 7000 के करीब प्रतिभागी इतने प्रभावित हुए कि हर कोई उनका मुरीद हो गया | हर कोई उनसे भारत के बारे मे जानना चाहता था कि भारत विश्वगुरू कैसे बना था, किस प्रकार वहां के लोगो मे एक सकारात्मक सोच थी | उसके बाद उन्होने वहां सनातन धर्म के लिए वेदांत सोसायटी की स्थापना की | जब वे भारत वापिस आये तो देश के युवा उनके स्वागत करने मे सबसे आगे थे | भारत में जगह जगह स्वागत हुआ और युवाओ को सनातन धर्म के साथ साथ देश को गुलामी से उबारने के लिए उनमे जोश भरा और कहा संघर्ष करो, जब तक मत रूको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति ना हो जाए | इसके बाद उन्होने 39 वर्ष की आयु मे शरीर का त्याग कर दिया | पंरतु आज भी स्वामी विवेकानंद युवाओ के प्रेरक है और रहेंगे | एबीवीपी लगातार 1949 से स्वामी विवेकानंद को अपना आदर्श मानकर शिक्षा संस्थानो मे पढ़ने वाली छात्रशक्ति को देश के लिए प्रेरित कर रही है और देश के पुन:निर्माण मे भागीदारी निभा रही है | इसी कारण आज एबीवीपी दुनिया का सबसे बड़ा छात्र संगठन है | एस डी कॉलेज और राजकीय महाविद्यालय मे विचार संगोष्ठी का आयोजन हुआ | इन कार्यक्रमो मे विशेष रूप से जिला प्रमुख विजय कुमार, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दीपक शर्मा व नंदनी गर्ग, तीनो कॉलेजो के अध्यक्ष पूजा रावत, भवानी ठाकुर, तरूण दीक्षित, उपाध्यक्ष मीनू ठाकुर, संजू तेवतिया, नगर अध्यक्ष अशोक चंदीला, हिंमाशु, भूमिका, श्वेता, पूनम, नेहा, लोकेश, दीपक, दलिप, हरेंदर, अरूण, पवन, अमित, विष्णु सहित सभी कार्यकर्ता मौजूद रहे |

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