पूर्व उप आवास आयुक्त वीके चौधरी 300 करोड़ के भूमि स्कैम में अरेस्ट

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लखनऊ, । एनएचआरएम घोटाले में लिप्त भ्रष्ट अधिकारी वीके चौधरी की एक और मामले में शुक्रवार को गिरफ्तारी हुई है। बताया जा रहा है कि इन्होंने उप आवास आयुक्त/ सब रजिस्ट्रार के पद पर रहते हुए इंद्रपान एस्टेट सहकारी आवास समिति लि. मेरठ की 52 एकड़ जमीन पर भूमाफियाओं से साठ-गांठ कर समिति को हाईजैक कराकर लगभग 250 से 300 करोड़ का घोटाला किया। इसके चलते स्थानीय पुलिस ने पूर्व उप आवास आयुक्त वीके चौधरी को गोमतीनगर से गिरफ्तार किया है। इसमें तत्कालीन सहकारी अधिकारी आवास (मेरठ) राज कुमार की संलिप्तता का आरोप है। इस मामले में वर्ष 2015 में मेरठ के पल्लवपुरम में न्यायालय के आदेश पर एफआइआर दर्ज की गई थी। बता दें, एनएचआरएम घोटाले में अभियुक्त वीके चौधरी पर इस मामले में 9 एफआइआर पहले से ही दर्ज हैं। ये है पूरा मामला दरअसल, मामला साल 2004 का है। बताया जा रहा है कि इन्होंने उप आवास आयुक्त/ सब रजिस्ट्रार के पद पर रहते हुए इंद्रपान एस्टेट सहकारी आवास समिति लिमिटेड मेरठ की 52 एकड़ जमीन पर भूमाफियाओं से साठ-गांठ कर समिति को हाईजैक कराकर लगभग 250 से 300 करोड़ का घोटाला करने का आरोप है। इस आवास समिति पर भूमाफिया सत्यपाल सिंह देशवाल, राजमोहन, आरपीएस चौधरी कब्जा कराने के उद्देशय से साल 2004 में तत्कालीन सहकारी अधिकारी अावास मेरठ राज कुमार के साथ मिलीभगत कर षडयंत्र रचा। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से इस आवास समिति का फेक रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट वनाकर जारी कर दिया। जबकि 18 मार्च 1985 में इस समिति का संख्या 914 पर रजिस्ट्रेशन हुआ था। उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम 1965 की धारा 8(1) के अंतर्गत ओमकार यादव सहायक आवास अायुक्त/ सहायक रजिस्ट्रार द्वारा इस समिति का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी किया गया, जो इसी धारा में दिये गए प्राविधान के अंतर्गत रजिस्ट्रेशन निरस्त होने तक वैध है। इस संबंध मं तत्कालीन मंडलायुक्त, मेरठ डॉ प्रभात कुतार ने एक जांच कराई जिसमें भी इसके अपराध की पुष्टि हुई।

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