बाहुबली के आगे बौना हुआ महकमा, अतीक के इशारे पर डिलीट हुई थी सीसीटीवी फुटेज

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गोरखपुर । देवरिया का जिला कारागार बाहुबली अतीक अहमद का महफूज ठिकाना था। उसके एक इशारे पर बंदी से लेकर बंदीरक्षक दौड़ लगाते थे। अतीक के खौफ का आलम यह था कि डेढ़ वर्ष के अंदर उसकी बैरक तक नहीं बदली गई। जेल में बाहुबली का सिक्का चलता था। इसका नतीजा रहा कि अतीक अहमद के इशारे पर रियल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल की पिटाई की वीडियो फुटेज डिलीट हो गई। जिला कारागार में मोहित के दो बार जाने की पुष्टि हो रही है। सूत्रों का कहना है कि बैरक नंबर सात में मोहित की पिटाई की गई थी। सीसीटीवी फुटेज में जेल के अंदर मुलाकात स्थल से होते हुए मोहित बैरक की तरफ जाते दिखाई दे रहा है। अतीक के बैरक में कैमरा नहीं होने के कारण मारपीट कैद नहीं हो पाई, लेकिन बैरक के बाहर कैंपस में कारोबारी के बेइज्जत करने का वीडियो रिकार्ड हो गया था। लखनऊ में अतीक पर केस दर्ज होते ही उसके एक इशारे पर जेलकर्मियों ने फुटेज को डिलीट कर दिया, ताकि कोई सबूत न मिल सके। लखनऊ के कृष्णानगर थाने की पुलिस जेल के सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल कर रही है। जेल कार्यालय में फुटेज वाली जगह पर आने और जाने वाले लोगों की पड़ताल की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज डिलीट कब किया गया यह हार्डडिस्क से पता चल जाएगा। मुख्यालय से जांच होने की खबर से जेलकर्मियों की सांस अटकी हुई है। जांच अगर सही दिशा में चली तो आधा दर्जन से अधिक बंदीरक्षकों पर कार्रवाई हो सकती है। लखनऊ पुलिस बंदीरक्षकों का काल डिटेल खंगालने की तैयारी कर रही है।रियल एस्टेट कारोबारी मोहित जायसवाल की जेल में पिटाई के बाद पहली बार अतीक पर कार्रवाई हुई है। देवरिया जेल में उसके विवादों की फेहरिस्त अपराध के रिकार्ड की तरह लंबी है। बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के आरोपित सुनील राठी के भाई अरविंद राठी को देवरिया जेल में खुली चुनौती अतीक ने दी थी, उसके भय से अरविंद राठी को बैरक की जगह जेल के कांफ्रेस हाल में रखा गया था और अगले दिन राठी को बाराबंकी जेल में शिफ्ट कर दिया। मुंबई के कारोबारी बसपा नेता से करीब दो करोड़ रुपये रंगदारी का आडियो देवरिया जेल से वायरल हुआ, लेकिन लखनऊ मुख्यालय ने संज्ञान तक नहीं लिया। जनवरी और जुलाई में छापेमारी के दौरान अतीक की बैरक से मोबाइल, पेनड्राइव सहित कई आपत्तिजनक सामान मिले, लेकिन उसके खिलाफ नामजद मुकदमा नहीं दर्ज हुआ। तत्कालीन डीएम सुजीत कुमार ने लखनऊ कारागार प्रशासन से अतीक को दूसरी जेल में शिफ्ट करने के लिए पत्र लिखा था। शासन में अतीक की पैठ की वजह से उसका तबादला भी रूक गया। जेल की बैरक नंबर सात में अतीक के लिए सब कुछ व्यवस्थित था। समय रहते बाहुबली पर कार्रवाई नहीं हुई, जिसका नतीजा देवरिया जेल सुर्खियों में आ गया। इस संबंध में देवरिया के एसपी एन कोलांची ने कहा कि फुटेज डिलीट की जांच लखनऊ पुलिस करेगी। जेल में रहने वाले लोगों की मिलीभगत के बिना यह काम संभव नहीं है। अतीक के संपर्क में रहने वाले लोगों की पड़ताल चल रही है। जल्द की सच्‍चाई सामने आ जाएगी।

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