वाराणसी जिला जेल में सपा नेता पर बंदियों ने डंडों से किया हमला

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देवरिया जेल की बैरक में प्रॉपर्टी डीलर की पिटाई जैसा मामला बुधवार को वाराणसी जिला जेल में भी सामने आ गया। आपराधिक मामलों के आरोपी से मुलाकात करने गए समाजवादी पार्टी के नेता अमिक अहमद उर्फ ईशान पर बंदियों ने डंडों से हमला कर दिया। अमिक की तहरीर पर कैंट थाने में पांच आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। प्रथम दृष्टया सामने आया है कि दोनों पक्षों की रंजिश में घटना को अंजाम दिया गया है। सरैयां निवासी अमिक के अनुसार सपा नेता प्रभु साहनी की हत्या के मामले में पैरवी करने के कारण जेल प्रशासन ने मिलीभगत कर हत्याकांड के आरोपी शिव निषाद, विनोद निषाद, जितेंद्र निषाद, रिजवान अंसारी उर्फ पप्पू और अफरोज अहमद ने उस पर हमला किया। हमला हत्या करने की नीयत से किया गया। उन्होंने बताया कि वह 12 हजार के इनामी अपने दोस्त राहुल यादव से मुलाकात करने गए थे। अमिक के अनुसार जिला जेल की बैरक नंबर 14 के सामने हॉस्पिटल गेट के पास वह राहुल से बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान रिजवान और उसके साथी बंदियों ने उन पर डंडों से ताबड़तोड़ प्रहार शुरू कर दिया। बंदीरक्षकों और अन्य मुलाकातियों ने बीचबचाव कर उन्हें किनारे किया। इस पर हमलावर जान से मारने की धमकी देते हुए बैरकों की ओर भाग निकले। जेल प्रशासन ने अस्पताल में प्राथमिक उपचार कराकर अमिक को कैंट थाने भेजा। दूसरी बैरक से आए बंदी और डंडा मिल गया अमिक के अनुसार रिजवान सहित अन्य आरोपी दूसरी बैरकों में बंद थे। फिर भी उसे देख कर अचानक सभी कैसे सामने आ गए और हमला करने के लिए डंडा कहां से मिल गया? हमला करने वाले बंदियों से मुलाकात करने भी कोई नहीं आया था। सभी को जानबूझकर बैरकों से बाहर निकाला गया। जेल प्रशासन से मिलीभगत कर हमलावर उसकी हत्या करना चाहते थे। उधर, जेलर पीके त्रिवेदी ने बताया कि रिजवान अस्पताल गया था और वहीं से लौट रहा था। उसके अनुसार उसे राहुल से मुलाकात करने आए अमिक ने घूरा। रिजवान और अमिक की पुरानी रंजिश है। घूरने को लेकर रिजवान ने लंबरदार का डंडा छीन कर अमिक पर वार कर दिया। रिजवान और उसके साथ रहे बंदी अफरोज के खिलाफ कार्रवाई के लिए कैंट थाने में तहरीर दी गई है। जेल प्रशासन दोनों पर कार्रवाई करेगा। जरूरत पड़ी तो रिजवान और अफरोज को दूसरी जेल में शिफ्ट करने की संस्तुति की जाएगी। बंदीरक्षकों की कमी, एक साल से अधीक्षक नहीं जिला जेल में मौजूदा समय में दो हजार से ज्यादा बंदी निरुद्ध हैं। 747 बंदियों की क्षमता वाली जेल में कर्मचारियों की भारी कमी है, जिससे सारी व्यवस्थाएं धड़ाम हो गई हैं। जेल मैन्युअल के अनुसार, 10 बंदियों पर एक बंदीरक्षक होना चाहिए, मगर मौजूदा समय में 68 बंदीरक्षक ही तैनात हैं और 25 पद रिक्त हैं। जेल वार्डर के पांच और डिप्टी जेलर के दो पद खाली हैं। एक साल से ज्यादा समय से जेल अधीक्षक का पद भी खाली है। उधर, बागपत जेल में गोलियों का शिकार बने मुन्ना बजरंगी के इशारे पर उसके गुर्गों ने 2004 में जिला जेल में निरुद्ध रहे वंशी यादव की हत्या कर दी थी। वंशी की हत्या में बजरंगी के शूटर अन्नू त्रिपाठी और बाबू यादव का नाम सामने आया था। 2005 में सेंट्रल जेल में निरुद्ध अन्नू त्रिपाठी की हत्या गोली मार की गई थी। वहीं, 23 नवंबर 2013 को जिला जेल के डिप्टी जेलर रहे अनिल त्यागी की हत्या मुन्ना बजरंगी ने अपने गुर्गों से करा दी थी।

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