सभी DM को जांच के निर्देश, एक महीने में सौंपनी होगी रिपोर्ट

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स्कूलों में मासूम छात्रों की थाली से निवाला चुराने वाले दोषियों पर सरकार सख्त कार्रवाई करेगी. शासन की तरफ से प्रदेश के सभी जिलों में मिड डे मील के खातों और उसके वितरण की जांच के निर्देश दिए गए हैं. ये सारी कार्रवाई बाराबंकी में मिड डे मील बांटने के नाम पर किए गए करीब सवा चार करोड़ के घोटाले की पोल खुलने के बाद शुरू हुई है. न्यूज 18 ने पहले ही मिड डे मील के नाम पर चल रहे बड़े घोटाले के मुद्दे को प्रमुखत से खबरों में दिखाया था. शासन के निर्देश पर निदेशक मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण ने सभी डीएम और बीएसए को मिड डे मील से जुड़ी जांच के निर्देश दिए हैं. खुद डीएम की निगरानी में यह पूरी जांच कराई जाएगी. जांच की रिपोर्ट एक महीने में सचिव, बेसिक शिक्षा को दी जानी है. बाराबंकी मामले में विभाग की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि घोटाला करने वालों ने फर्जी स्कूलों के नाम से आईडी बनाकर खाते खुलवाए और ट्रेजरी से बजट ट्रांसफर कराया. यह खेल 2013 से चल रहा था. लंबे समय से मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण की जानकारी में भी आ रहा था कि प्रदेश के कई स्कूलों में या तो मिड डे मील बांटा नहीं जा रहा है या जानकारी नहीं दी जा रही है. प्रदेश के 971 स्कूलों ने 1 जुलाई से 18 सितंबर, 2018 तक मिड डे मील बांटने से जुड़ी जानकारी मिड डे मील प्राधिकरण को नहीं दी. वहीं 27 स्कूल ऐसे भी मिले जिन्होंने इस दौरान मिड डे मील बांटा ही नहीं. इतना ही नहीं लखनऊ में जब अनुदानित विद्यालयों की जांच हुई तो यह भी सामने आया कि जिस विद्यालय में 187 छात्राएं पंजीकृत थीं वहां 391 छात्राओं को मिड डे मील बांटने की एंट्री की गई थी. ऐसा ही घोटाला कुछ और स्कूलों में भी किया गया.

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