आओ आपके पास जो कुछ है उससे मिलें

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यह मनुष्य का स्वभाव होता है कि उसके पास जो कुछ होता है, उसकी तरफ उसका जरा भी ध्यान नहीं जाता है, वह उसकी पूरी उपेक्षा करता है, उससे असंतुष्ट रहता है, उसकी शिकायत करता रहता है, उसको महत्वहीन समझता है, बहुत कम समझता है और मैं तो यहां तक कहता हूं कि उसको नगण्य समझता है। और यही कारण है कि उसके पास जो नहीं है, उसके लिए तडफ़ता रहता है, बेचैन रहता है, उसे पाने के लिए हाथ-पैर मारता रहता है वह भी हवा में और वह जिंदगी कभी सुख की, शांति की, आनंद की, कृतज्ञता की सांस नहीं ले पाता है। यह प्रकृति का सटीक नियम है कि यदि आपके पास जो कुछ भी है और आप उसके प्रति आभारी नहीं रहे, कृतज्ञ नहीं रहे तो वह भी आपके पास से चला जाएगा, नया और अधिक आना तो बहुत दूर की बात है। आपके पास अधिक तभी आएगा जब उसके प्रति आप बहुत कृतज्ञ रहेंगे।

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आप धन्यवाद दें अपने हाथों को, उनके प्रति पूरी तरह से कृतज्ञ बनें कि मेरी जीवन यात्रा में इनकी अहम् भूमिका हैं, अपने पैरों को धन्यवाद दें जो आपकी खूबसूरत इबारत लिखने में मंजिल तक ले जाते हैं, सोचिए उन भाई बहनों के बारे में जिनको यह सौभाग्य नहीं मिला है बावजूद वे अपनी शानदार इबारत लिख रहे हैं। अपने शरीर को, सभी अंगों को, नसों में दौड़ते लहू को, हृदय की धडक़ती धडक़न, भीतर-बाहर आती-जाती सांस को पूरी निष्ठा विनम्रता और कृतज्ञता से धन्यवाद दीजिए और बार-बार मन से-दिल से बोलिए कि मैं स्वस्थ हूं, मैं सक्षम हूं, मैं सब कुछ कर सकता हूं, मेरे सारे अंग स्वस्थ और एक्टिव-स्मार्ट हैं, मेरा वजन आदर्श है, मैं बहुत खुश हूं।

अब बात आती है भौतिक सम्पति की, धन की, जमीन की, जेवरात की, कपड़ों की, घर की, वस्तुओं की और स्टेटस सिम्बल की। इसमें भी प्रकृति का वही नियम लागू होता है। यदि आपके पास पांच हजार रुपए हैं लेकिन आप उन पांच हजार रुपयों से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है और पचास हजार रुपयों की प्राप्ति की बात करते हैं व्यग्र हैं उग्र हैं तो यह निश्चित मानिए आपके पास से वे पांच हजार रुपए भी बहुत जल्द चले जाएंगे, पचास हजार रुपए आने की तो बात ही छोडि़ए। यदि आपके पास घर है, परिवार है, गाड़ी है, घर में सभी वस्तुएं भी हैं, नौकरी या व्यापार भी है, कपड़े और मन पसंद चीजें भी हैं तो इसका मतलब यह हुआ कि आप उनके प्रति आभारी हैं, कृतज्ञ हैं, उन सब के प्रति सम्मान की भावना रखते हैं, उनको आदर देते हैं और यही कारण होता है कि आपके पास और भी बहुत कुछ आएगा। जो भी आपके पास है वह इसलिए है कि आप उसके प्रति आभारी रहें, कृतज्ञ रहें और उन्हें सम्मान दें। 

यही बात संबंधों पर लागू होती है यदि आप अपनों के प्रति, परिचितों के प्रति, रिश्तेदारों के प्रति, पड़ौसियों के प्रति और परिजनों के प्रति आदर भाव रखेंगे, समभाव रखेंगे, कृतज्ञता का भाव रखेंगे और उनके सहयोग के प्रति अच्छी भावना के प्रति, प्रेम के प्रति और अपनत्व के प्रति भी विनम्र और आभारी रहेंगे तो उनके साथ आपके संबंध बहुत प्रगाढ़ रहेंगे, मधुर रहेंगे और हमेशा अच्छे बने रहेंगे। और यदि आप अपनों और परिजनों के प्रति शिकायत के भाव में रहेंगे, निंदा के भाव में रहेंगे, झगड़ने के भाव में रहेंगे, प्रतिशोध के भाव में रहेंगे, गिराने के भाव में रहेंगे तो फिर आपके साथ उन सबके रिश्ते कभी भी मधुर और स्थायी हो ही नहीं सकते। आइए, जो कुछ भी आपके पास है ज्ञान, विद्या, धन, संबंध या अन्य सब कुछ, कृपया उस सबके प्रति मन से दिल से आभारी रहें, उन सबको सम्मान दें और बार-बार जिस भी माध्यम से वे आप तक पहुंची हैं उन सबको धन्यवाद एक बार नहीं, बार-बार दें, फिर देखिए आपके जीवन में वह सब कुछ भर जाएगा जिसकी आपको जरूरत है। लेकिन हर हाल में आपकी अपनी चीजों, शरीर, संबंधों, धन-दौलत, ज्ञान-विद्या और अन्य सब कुछ के प्रति दिल से आभारी रहना ही होगा और श्रीप्रभु को बार-बार धन्यवाद कहना ही होगा।

प्रेरणा बिन्दु:- 

आभारी रहें उन सबके प्रति

जो भी पास तुम्हारे हैं

आ जाएंगे चंद दिनों में

जो सुख दुनिया के सारे हैं।

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