85 साल बाद कैसे मिली भगत सिंह की पिस्तौल

0
Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

Loading…

इमेज कॉपीरइट
DISCOVERY OF BHAGAT SINGH’S PISTOL/BBC

Image caption

भगत सिंह की इस्तेमाल की हुई पिस्तौल

अंग्रेज़ हुकूमत के खिलाफ बगावत करने वाले भगत सिंह पर कई किताबें लिखी गई, फिल्में बनी और अलग-अलग विचारधारा के लोगों ने उनपर अपने-अपने तरीके से हक़ भी जताया. भगत सिंह पर बनी फिल्मों में आपने अक्सर एक सीन देखा होगा जिसमें उनका किरदार निभा रहे अभिनेता अंग्रेज़ अफसर जॉन सॉन्डर्स को गोली मार देते हैं.भगत सिंह और उनके साथियों से जुड़ी वस्तुओं की प्रदर्शनी भी कई लोगों ने देखी होगी. लेकिन भगत सिंह से जुड़ी एक खास चीज़ है जो फिल्मी परदे या फिर गाड़ियों और दीवारों पर अक्सर उनकी तस्वीर के साथ नज़र आ जाती है. वो चीज़ है उनकी इस्तेमाल की हुई पिस्तौल.

इमेज कॉपीरइट
BBC/PUNEET

भगत सिंह की पिस्तौलभगत सिंह को फांसी दिए जाने के बाद उनकी इस्तेमाल की हुई पिस्तौल कहां गई? 20वीं सदी में इस्तेमाल की गई पिस्तौल इतने साल कहां पड़ी रही और कैसे 21वीं सदी में ये लोगों के सामने आई. भगत सिंह की पिस्तौल को दुनिया के सामने लाने वाले और इस सारी जद्दोजहद पर किताब लिखने वाले पत्रकार जुपिंदरजीत ने प्रेस24 से पिस्तौल की खोज के बारे में विस्तार से बात की. भगत सिंह पर आरोप था कि उन्होंने अंग्रेज़ अफसर सॉन्डर्स की हत्या अमरीका में बनी .32 बोर की कौलट सैमी ऑटोमेटिक पिस्तौल से की.

Image caption

किताब ‘डिस्कवरी ऑफ भगत सिंह पिस्टल’ के लेखक और पत्रकार जुपिंदरजीत सिंह

पिस्तौल की खोजजुपिंदरजीत ने चंद्रशेखर आज़ाद के इस्तेमाल किए हुए हथियार के बारे में अक्सर चर्चा सुनी थी. लोग उनके हथियारों के साथ सेल्फी लेते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार ने इस हथियार को अच्छे तरीके से संभाल कर रखा है. जुपिंदरजीत कहते हैं कि उनके मन में कई साल पहले ये ख्याल आते थे कि भगत सिंह की पिस्तौल का क्या हुआ, पिस्तौल कहां गई और किसके पास है. वो बताते हैं कि 2016 में उन्होंने पिस्तौल को ढूंढना शुरू किया. काफी मेहनत के बाद वो ये जानने में कामयाब हुए कि पस्तौल को भगत सिंह की फांसी के बाद कहां भेजा गया था.

इमेज कॉपीरइट
DISCOVERY OF BHAGAT SINGH’S PISTOL/BBC

Image caption

1944 में पंजाब के फिलौर ट्रेनिंग अकादमी में लाहौर से लाए गए हथियारों के कागज़ात

फिल्लौर पुलिस अकादमी2016 में पिस्तौल का नंबर मिलने पर उन्हें पहली कामयाबी मिली. भगत सिंह की ओर से इस्तेमाल की गई .32 बोर की कोल्ट सेमी ऑटोमेटिक पिस्तौल का नंबर है – 168896.पिस्तौल के कागज़ात और अपनी खोजबीन के आधार पर वो कहते हैं, “1931 में लाहौर उच्च न्यायालय ने पिस्तौल को पंजाब के फिल्लौर पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में भेजने का निर्देश दिया. वो बात अलग है कि पिस्तौल को यहां पहुंचते-पहुंचते 13 साल लग गए. 1944 में ये पिस्तौल फिल्लौर लाई गई.”पिस्तौल का नंबर तो पता चल चुका था. फिर ये भी पता चला कि पिस्तौल कहां रखी गई है. जुपिंदरजीत के मुताबिक उन्होंने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की मदद से पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में पिस्तौल को ढूंढना शुरू करवाया.

इमेज कॉपीरइट
DISCOVERY OF BHAGAT SINGH’S PISTOL/BBC

1968 में पिस्तौल मध्य प्रदेश भेजी गईजुपिंदरजीत कहते हैं, “यहां भी राह आसान नहीं थी. रिकॉर्ड खंगालने के बाद पता चला कि लाहौर से आए हथियारों में से साल 1968 में 8 हथियार मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित बीएसएफ के सेंट्रल स्कूल ऑफ वेपन्स एंड टैक्टिक्स भेज दिए गए थे.”ये तब की बात है जब भारत में बार्डर सिक्योरिटी फोर्स वजूद में आई और इंदौर में इसकी ट्रेनिंग अकादमी बनी. उस वक्त राष्ट्रपति ने सारे राज्यों को चिट्ठी लिखी थी कि इस अकादमी में प्रशिक्षण के लिए अपने-अपने राज्यों से हथियार भेजें.पंजाब से जो 8 हथियार अकादमी में गए, उनमें भगत सिंह की इस्तेमाल की हुई पिस्तौल भी थी. पिस्तौल से पेंट कुरेदकर ढूंढा गया नंबरजुपिंदरजीत के मुताबिक इंदौर से इसकी जानकारी हासिल करना भी बहुत मुश्किल काम था. उन्होंने बताया, “बड़ी मुश्किल से बीएसएफ के आईजी पंकज से संपर्क हो सका. वो इन हथियारों के बारे में जानकारी दे सकते थे.” उन्होंने आगे बताया कि हथियारों को जंग से बचाने के लिए पेंट करके रखा जाता था. जुपिंदर के मुताबिक, “आईजी पंकज ने पंजाब से आए हथियारों की लिस्ट उठाई और उस लिस्ट में मौजूद हथियारों से पेंट हटाना शुरू किया. तीसरा ही हथियार वो पिस्तौल था जिसकी हमें तलाश थी. भगत सिंह की पिस्तौल के नंबर से इस पिस्तौल का नंबर मैच हो गया था.”अब समस्या ये थी कि इस पिस्तौल को पंजाब कैसे लाया जाए. पिस्तौल के कागज़ात के आधार पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई. इस याचिका में कहा गया कि पिस्तौल पर असल हक पंजाब का है. इसलिए इसे पंजाब के हवाले किया जाए.इस मुद्दे को बड़े पैमाने पर उठाने और अदालत के दखल के बाद पिस्तौल को पंजाब भेजे जाने का रास्ता साफ हो गया.

इमेज कॉपीरइट
DISCOVERY OF BHAGAT SINGH’S PISTOL/BBC

पंजाब के हुसैनिवाला में रखी गई पिस्तौलअब इस पिस्तौल को पंजाब के हुसैनिवाला के म्यूज़ियम में रखा गया है. भगत सिंह के गांव, खटकर कलां के म्यूज़ियम में इस पिस्तौल को इसलिए नहीं रखा गया क्योंकि हुसैनिवाला की सरहद पर रोज़ाना बड़ी संख्या में लोग आते हैं. अमरीका में बनी ये पिस्तौल भगत सिंह को किसने दी और किससे ले कर दी, इसके सबूत नहीं मिलते हैं. जुपिंदर ये पता लगाने की कोशिश भी कर रहे हैं. भगत सिंह की जेल डायरी दुनिया के सामने लाने वाले प्रोफेसर मालविंदरजीत सिंह वड़ैच ने भी जुपिंदरजीत की खोज को किताबी रूप देने की सराहना की है. ये भी पढ़ें…पाकिस्तान में कैसे याद किए जाते हैं भगत सिंह?भगत सिंह की ज़िंदगी के वे आख़िरी 12 घंटेभगत सिंह की भूख हड़ताल पर क्या बोले थे जिन्ना?भगत सिंह नास्तिक क्यों थे?(प्रेस24 हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं.आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

(ये खबर सिंडिकेट फीड से सीधे ऑटो-पब्लिश की गई है.प्रेस24 न्यूज़ ने इस खबर में कोई बदलाव नहीं किया है.आधिक जानकारी के लिए सोर्से लिंक पर जाए।)

सोर्से लिंक

قالب وردپرس

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

शयद आपको भी ये अच्छा लगे लेखक की ओर से अधिक

टिप्पणियाँ

Loading...