जन्मदिन विशेष: आमिर, शाहरूख जैसे कलाकारों की आवाज कहे जाने वाले उदित नारायण आज मना रहे अपना 62वां जन्मदिन

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मुंबई। आकाशवाणी नेपाल से अपने कैरियर की शुरूआत करके शोहरत की बुंलदियों तक पहुंचने वाले बालीवुड के प्रसिद्ध पार्श्वगायक उदित नारायण आज भी अपने गीतों से श्रोताओं के दिलों पर राज करते है। उदित नारायण झा का जन्म नेपाल में एक दिसंबर 1955 को मध्यवर्गीय ब्राह्मण परिवार में हुआ। बचपन के दिनों से ही उनका रूझान संगीत की ओर था और वह पार्श्वगायक बनना चाहते थे।

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इस दिशा में शुरूआत करते हुए उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा पंडित दिनकर कैकिनी से हासिल की। उदित नारायण ने गायक के रूप में अपने करियर की शुरूआत नेपाल में आकाशवाणी से की जहां वह लोक संगीत का कार्यक्रम पेश किया करते थे। लगभग आठ वर्ष तक नेपाल के आकाशवाणी मंच से जुड़े रहने के बाद वह 1978 में मुंबई चले गये और भारतीय विद्या मंदिर में स्कॉलरशिप हासिल कर शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेने लगे।

वर्ष 1980 में उदित नारायण की मुलाकात मशहूर संगीतकार राजेश रौशन से हुयी जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचान करके अपनी फिल्म उन्नीस बीस में पार्श्वगायक के रूप में उन्हें काम करने का मौका दिया लेकिन दुर्भाग्य से यह फिल्म टिकट खिडक़ी पर बुरी तरह नकार दी गई। दिलचस्प बात है कि इस फिल्म में उन्हें अपने आदर्श मोहम्मद रफी के साथ पार्श्वगायन का मौका मिला। 

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लगभग दो वर्ष तक मुंबई में रहने के बाद वह पार्श्वगायक बनने के लिये संघर्ष करने लगे। आश्वासन तो सभी देते लेकिन उन्हें काम करने का अवसर कोई नहीं देता था। इस बीच उदित नारायण ने गहरा जख्म, बड़े दिल वाला, तन बदन, अपना भी कोई होता और पत्तों की बाजी जैसी बी और सी ग्रेड वाली फिल्मों में पार्श्वगायन किया लेकिन इन फिल्मों से उन्हें कोई खास फायदा नहीं पहुंचा।

लगभग दस वर्ष तक मायानगरी मुंबई में संघर्ष करने के बाद 1988 में नासिर हुसैन की आमिर खान अभिनीत फिल्म कयामत से कयामत तक में अपने गीत पापा कहते है बड़ा नाम करेगा की सफलता के बाद उदित नारायण पाश्र्वगायक के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गये। कयामत से कयामत तक की सफलता के बाद उदित नारायण को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गये जिनमें राम अवतार, त्रिदेव ,महासंग्राम ,दिल, सौगंध, फूल और कांटे जैसी बड़े बजट की फिल्में शामिल थी।

इन फिल्मों की सफलता के बाद उदित नारायण ने सफलता की नयी बुलंदियों को छुआ और एक से बढकऱ एक गीत गाकर श्रोताओं को मंत्रमुंग्ध कर दिया। नारायण अब पांच बार फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किये जा चुके है। हिन्दी सिनेमा जगत में उदित नारायण के महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुये उन्हें वर्ष 2009 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

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वर्ष 2002 में फिल्म लगान के गीत ‘सुन मितवा’ और 2003 में फिल्म जिंदगी खूबसूरत है के गीत. छोटे छोटे सपने ..के लिये वह सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किये गये। आमिर खान, शाहरूख खान जैसे नामचीन नायकों की आवाज कहे जाने वाले उदित नारायण ने तीन दशक से भी ज्यादा लंबे कैरियर में लगभग 15000 फिल्मी और गैर फिल्मी गाने गाये हैं।

उन्होंने हिन्दी के अलावा उर्दू, तमिल, बंगला, गुजराती, मराठी, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, उड़िया और नेपाली फिल्मों के गीतों के लिये भी अपना स्वर दिया है। उदित नारायण ने कई गैर फिल्मी गीतों के गायन से भी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया है। उनके गाये प्राइवेट अलबम में कुछ हैं ..भजन संगम, भजन वाटिका, आई लव यू, दिल दीवाना यह दोस्ती लव इज लाइफ, झुमका दे झुमका मां तारिणी, धुली गंगा प्रमुख है।

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बहुमुखी प्रतिभा के धनी उदित नारायण ने नेपाली फिल्मों में अभिनय भी किया है। इनमें कुसुमे रूमाल और पिराती प्रमुख है। इसके अलावा उन्होंने भोजपुरी सुपरहिट हिट फिल्म कब होइ गवनवां हमार.का निर्माण भी किया है। उदित नारायण भारत के अलावा अमरीका, कनाडा, वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका में स्टेज कार्यक्रम पेश भी कर चुके है। वह आज भी अपनी मधुर आवाज से संगीत जगत को सुशोभित कर रहे है।

 









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