अयोध्या सरयू तट पहुंची 84 कोसी परिक्रमा, मंगलवार को भक्गण करेंगे रामकोट की परिक्रमा

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वासुदेव यादव अयोध्या।फैजाबाद, श्री अयोध्याधाम चैरासी कोस परिक्रमा धर्माथे सेवा संस्थान के अध्यक्ष महंत गयादास महराज के संयोजन में चल रही 84 कोसी परिक्रमाथियों का दल सोमवार को अयोध्या सरयू तट पर पहुंचा। मंगलवार की सुबह लगभग छः बजे सभी परिक्रमार्थी रामकोट अयोध्या का राम नाम संकीर्तन के साथ परंपरागम रूप से परिक्रमा करके सीताकुंड पहुंचेगे। जहा पर महंत गयादास महराज के पावन सानिध्य में रामार्चा पूजन का महाअनुष्ठान और कार्यक्रम की पूर्णाहुति होगी। इसके बाद 25 अप्रैल को परिक्रमाथियों का विशाल भंडारा और विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा।

इस चैरासी कोसी परिक्रमा के आयोजक महंत गयादास ने बताया है कि बीते 31 मार्च को अयोध्या के रायगंज स्थित नरोत्तम भवन से यात्रा शुरू हुई थी। एक अपै्रल को सुबह बस्ती जिला के मखौडाधाम से यात्रा विधिवत रूप से आरंभ हुई थी। इस यात्रा में हजारों भक्तगण शामिल रहे और परिक्रमा में पुण्यार्जन किए। उन्होंने बताया कि इस परिक्रमा के मात्र कर लेने से जन्म जन्मांतर के सभी पाप दूर हो रहे है। मानव को 84 लाख यौनियों से मुक्ति मिल जाती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह यात्रा कुल पांच जिलो बस्ती, अम्बेडकर नगर, फैजाबाद, गोण्डा और बाराबंकी से होकर गुजरती है। इस दौरान कुल यात्रा में प्रमुख 24 पडाव रहे। जहंा पर सत संग प्रवचन का आयोजन व रात्रि विश्राम आदि हुआ। उन्होंने बताया कि 84 कोसी परिक्रमा में कुल 252 किमी सड़क आता है। इसमें से 21 किमी को छोड़कर अन्य जगहों के सभी रास्ते काफी खराब है। जिससे परिक्रमार्थीगण काफी परेशान रहे और उनके पांव में छाले तक पड़ गए। उन्होंने शासन प्रशासन से मांग किया कि इस मार्ग का जल्द ही नवनिर्माण करवाया जाए। श्री महंत ने बताया कि यात्रा में अनवरत लगीाग 600 भक्तगण परिक्रमा किए। राम नगरी अयोध्या में भी मंगलवार की सुबह 6 बजे रामकोट की परंपरागत परिक्रमा करके भक्तगण स्वयं को कृतार्थ करेंगे।

इसके बाद यात्रा सीताकुण्ड पहुंचेगी और रामार्चा पूजन के बाद फलाहार होगा। 25 अप्रैल को परिक्रमाथियों का भण्डारा और विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस बार यात्रा में प्रशासन द्वारा काफी सुरक्षा का इंतजाम कराया गया जो काबिले ताराीफ है। इस यात्रा में प्रमुख से कई प्रांतों और जिलों के परिक्रमार्थीगण शामिल रहे। जिनमें से प्रमुखतः नेपालवासी जियावनपा, राजस्थान के महंत जयरामदास, एमपी के श्रवणप्रसाद दास, भरोसे महतो, रामदास रामायणी, बद्री प्रसाद, दिनेशदास, भवानी सिंह, सुंदा सिंह, जानकीदास, गुलाबा देवी, विद्यादास, विद्या माता एवं प्रभा देवी आदि शामिल रही।

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