Makar Sankranti 2018 : यहां कटी हुई पतंग का घर में प्रवेश करना माना जाता है शुभ

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पटना। मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी और चूड़ा-दही खाने के बाद पतंग उड़ाने की दशकों पुरानी परंपरा से जुड़े लोग आज बड़े ही हर्षोल्लास के साथ धमाल मचा रहे हैं। आज के दिन लोग खिचड़ी चूड़ा-दही खाने के बाद मकानों की छतों तथा खुले मैदानों की ओर दौड़े चले जाते हैं और पतंग उड़ाकर आनंदित होते हैं। इस दिन कई जगहों पर पतंग प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं जिसमें पतंग उड़ाने के शौकीन बढ़-चढक़र हिस्सा लेते हैं। 

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लोग सुबह से ही तरह-तरह की पतंगों के साथ अपने डोर और मांझे का स्टॉक जमाकर छतों पर चढ़ चुके हैं। जगह-जगह वो मारा-वो काटा जैसी जोर-जोर आवाजें सुनाई दे रही हैं। भारत के साथ ही दूसरे देषों में भी पतंगे उडाने की परंपरा है। प्रायः यह माना जाता है कि पतंग का आविष्कार ईसा पूर्व चीन में हुआ था। जापान में पतंगे उड़ाना और पतंगोत्सव एक सांस्कृतिक परंपरा है।

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यहां पतंग तांग शासन के दौरान बौद्ध भिक्षुओं के माध्यम से पहुंची। भारत में पतंग परंपरा की शुरुआत शाह आलम के समय 18 वीं सदी में की गयी लेकिन भारतीय साहित्य में पतंगों की चर्चा 13 वीं सदी से ही की गई है। मराठी संत नामदेव ने अपनी रचनाओं में पतंग का जिक्र किया है। 

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प्राचीन काल में जापान के लोगों में विश्वास था कि पतंगों की डोर वह जरिया है जो पृथ्वी को स्वर्ग से मिलाती है। चीन के लोगों में विश्वास है कि अगर पतंग उड़ाकर छोड़ दी जाए तो पतंग छोड़ने वाले का दुर्भाग्य आसमान में गुम हो जाएगा और यदि कोई कटी हुई पतंग उनके घर में प्रवेश करती है तो यह उनके लिए शुभ होगा। -एजेंसी 

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