रेगिस्तानी जहाज को समर्पित कैमल फेस्टिवल बीकानेर में हुआ शुरू

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जयपुर। दो दिवसीय कैमल फेस्टिवल बीकानरे में आयोजित किया जा रहा है। इस फेस्टिवल के दौरान ऊंटों की दौड, ऊंटनी दूहना, इसके केशों की आकर्षक कटाई के साथ ही अन्य आमोद-प्रमोद के आयोजन भी होंगे। इसका आयोजन राजस्थान सरकार का पर्यटन विभाग कर रहा है। बीकानेर में कैमल फेस्टिवल एक वार्षिक मेला है जो कि इस रेगिस्तानी जहाज को समर्पित है। इस दौरान ऊंटों को रंगबिरंगी पोशाक पहनाने के साथ ही उनसे विभिन्न प्रकार की मनोहरी गतिविधियां करवाई जाती है। इस फेस्टिवल में यादगार वस्तुओं की खरीदारी, विशेष व्यंजन एवं फोटोग्राफी के अच्छे अवसर मिलते हैं। दूसरी तरफ इस फेस्टिवल के दौरान अन्य मनोरंजनों में लोक नृत्य, फायर डांसर्स तथा चिताकर्षक आतिशबाजी होती है जिसे इस मरूप्रदेश का आसमान जगमगा उठेगा। 

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फेस्टिवल के पहले दिन पर्यटकों के लिए ऊंट की सवारी एवं कैमल सफारीज का आयोजन ग्राम रायसर (बीकानेर शहर और बीकानेर जयपुर हाइवे पर 15 किलोमीटर दूर) सुबह 8 बजे होगा। इसके बाद जूनागढ से डाॅ. करणीसिंह स्टेडियम तक रंगबिरंगे ऊंटों की शोभायात्रा निकाली जाएगी तथा स्टेडियम पर ही इस फेस्टिवल का उद्घाटन समारोह आयोजित किया जाएगा।

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इस समारोह के दौरान बैगपाइपर आर्मी बैंण्ड का आकर्षक प्रदर्शन होगा। इस अवसर विभिन्न प्रतियोगिताएं जैसे ऊंटों की सजावट, ऊंटों की ऊंन की आकर्षक डिजाइन में कटाई, ऊंट नृत्य, मिस मरवन एवं मिस्टर बीकाणा के आयोजन भी होंगे। इस दिन का समापन राजस्थानी कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ होगा। समापन दिवस यानी 14 जनवरी की शुरूआत रामपुरा हवेली से बीकाजी की टेकरी तक हेरिटेज वाॅक सुबह 9.30 बजे होगी।

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डाॅ. करणीसिंह स्टेडियम पर आगंतुक विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताएं जैसे रस्साकशी, ग्रामीण कुश्ती, साफा बंधाई (विदेशी पर्यटकों के लिए), ऊंटनी का दूध निकालने सहित अन्य आयोजन होंगे। इस मौके पर कबड्डी का एक प्रदर्शन मैच भी होगा। दोहपर बाद मटकी दौड़ और म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता होगी जिसमें महिलाएं भी भाग ले सकेंगी। इसके बाद पुरस्कार वितरण समारोह एवं राजस्थानी कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए जाएंगे। दर्शक इस मौके पर अग्नि नृत्य की प्रस्तुति देख कर सम्मोहित हो जाएंगे। फेस्टिवल के समापन के बाद आकर्षक आतिशबाजी होगी।

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