फिसलती जुबान से बहुत कुछ कहने के आदी हैं नितिन गडकरी!

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नितिन गडकरी अपने बयानों को लेकर पहली बार चर्चा में आए हैं, ऐसा नहीं है. वह पहले भी अपनी फिसलती जुबान को लेकर चर्चित हो चुके हैं. हाल ही में उन्होंने नौसेना को निशाने पर लिया.

उन्होंने कहा, असल में नेवी की जरूरत बॉर्डर पर है, जहां से आतंकवादी चुपचाप घुसपैठ की तलाश में रहते हैं. नेवी में हर कोई साउथ बॉम्बे में ही क्यों रहना चाहता है. वो (नेवी) मेरे पास आए थे और जमीन के बारे में पूछ रहे थे. मैं जमीन का एक इंच भी नहीं दूंगा. प्लीज दोबारा मेरे पास मत आइएगा. गडकरी ने एक कार्यक्रम में वेस्टर्न नेवल कमांड चीफ वाइस एडमिरल गिरीश लूथरा की मौजूदगी में ये बात कही है. न्यूज 18 में छपी खबर के मुताबिक नके बयान पहले भी विवादास्पद रहे हैं-

स्वामी विवेकानंद और दाउद इब्राहिम का आईक्यू है बराबर 

साल 2012 में उन्होंने कई लोगों के भावनाओं को ठेस पहुंचाई. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि स्वामी विवेकानंद और दाऊद इब्राहिम का आईक्यू लेवल बराबर है. लेकिन विवेकानंद ने इसका इस्तेमाल मानवता, भाईचारे के निर्माण के लिए किया. वहीं दाऊद इसे बर्बाद करने के लिए कर रहा है.

केंद्र में रामभक्तों की सरकार है 

साल 2015 में यूपी के फैजाबाद में एक जनसभा में भारत को नेपाल से जोड़नेवाली सड़क राम-जानकी मार्ग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र में रामभक्तों की सरकार है. वह जय श्री राम के नारे गर्व से लगाते हैं.

उन्होंने कहा कि ‘यह राम भक्तों की सरकार है, जो जय श्री राम के नारे चिल्लाते हैं, इसलिए मैं आपको वादा करता हूं कि राम वनगमन मार्ग को भी राष्ट्रीय राजमार्ग तक उन्नत बनाया जाएगा और यह काम चार महीनों में शुरू होगा.’

काम नहीं करनेवाले अफसरों को पीटो 

पिछले साल की शुरुआत में गडकरी ने एक और विवादास्पद बयान दिया. उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपना काम ठीक से नहीं करते हैं या रिश्वत लेते हैं, उन्हें पीटा जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि ‘मैं सरकार हूं, मैं आपको बता रहा हूं, अगर वे अपना काम ठीक से नहीं करते हैं तो उन्हें मारो. मीडिया मेरे बयान को मोड़ देगी, लेकिन कृप्या संदर्भ को समझें. अगर आप रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में शामिल होते हैं, तो लोग नहीं बचाएंगे. ऐसा इसलिए है क्योंकि हम पारदर्शिता और भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था की मांग करते हैं.’

आशा पारेख को किया शर्मिंदा 

अभिनेत्री आशा पारेख को प्रतिष्ठित पद्मभूषण पुरस्कार दिए जाने को लेकर नितिन गडकरी ने दावा किया था कि आशा पारेख ने उन्हें इस पुरस्कार के लिए पैरवी करने को कहा था. उन्होंने 17 अप्रैल को कहा था कि इस पुरस्कार के लिए आखा पारेख उनके घर का दौड़ लगाया करती थी. इसपर आशा ने कहा था कि यह बहुत ही दुख की बात है, मंत्री को ऐसा नहीं कहना चाहिए था.

कूद पड़े पद्मावत विरोध में 

बीते साल जब संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावत को लेकर देशभर में तूफान मचा था उस वक्त आग में घी डालते हुए पोत परिवहन मंत्री ने कहा कि फिल्मकारों को देश के इतिहास के छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए.



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