#संसदकेस्टार: आतंकवाद पर कसेगी लगाम या बढ़ जाएगा दुरुपयोग?

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नई दिल्ली। गैर कानूनी गतिविधि निवारण संशोधन बिल (यूएपीए) 2019 संसद के मौजूदा सत्र में पारित हो गया। सरकार दावा कर रही है कि इस कानून में बदलाव से आतंकवाद में शामिल लोगों की धरपकड़ पहले से आसान हो जाएगी। लेकिन विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों ने इसका यह कहते हुए विरोध किया है कि सरकार इसका दुरुपयोग करेगी और नागरिकों के अधिकार घट जाएंगे।
कब कितने बदलावयूएपीए कानून 1967 में आया था। समय के साथ आतंकवाद के तौर-तरीके बदलने से कानून में 2004 में पहला, 2008 में दूसरा व 2013 में तीसरा संशोधन किया गया। सभी संशोधन कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकारों के कार्यकाल में हुए। अब व्यक्ति भी घोषित होगा आतंकवादी पहले के कानून में आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने वाली संस्था को आतंकवादी घोषित किया जा सकता था लेकिन अब सरकार के पास किसी व्यक्ति को भी आतंकवादी घोषित करने का अधिकार होगा।
सरकार का तर्क है कि घटना संस्था नहीं, व्यक्ति करता है। संस्था पर प्रतिबंध लगता है तो संबंधित व्यक्ति उसे बंद कर दूसरी संस्था खोल लेता है। उस पर भी रोक लगी, तो तीसरी संस्था खोल दी। जब तक व्यक्ति को आतंकवादी घोषित नहीं करेंगे, तब तक इनके काम और इरादों पर लगाम लगाना असंभव है।
एनआइए को दी ज्यादा ताकत
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) भारत में आतंकवाद से मुकाबला करने के लिए केंद्र सरकार की एन्फोर्समेंट एजेंसी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी कानून 31 दिसंबर 2008 में बना था। इसके साथ ही एनआइए बनी। कानून में एनआइए को कई ताकतें दी गई। सरकार का दावा है कि कानून में संशोधन से विश्व भर के आतंकवादियों के अंदर एनआइए की धमक बढ़ेगी। आतंकी गतिविधि में शामिल व्यक्ति की संपत्ति जब्त व कुर्की होगी और इसके लिए राज्य के पुलिस महानिदेशक की अनुमति की जरूरत नहीं होगी।
एनआइए महानिदेशक को जब्ती कार्रवाई का अधिकार होगा
एनआइए के महानिदेशक को जब्ती संबंधी कार्रवाई शुरू करने का अधिकार होगा। वहीं जब कोर्ट अनुमति देगा, तब इसकी कुर्की होगी। जांच अधिकारी को किसी भी राज्य में वहां की सरकार या पुलिस से अनुमति के बिना रेड करने का अधिकार होगा। इसके लिए जांच अधिकारी को एनआइए डीजी की अनुमति की जरूरत होगी। अभी तक डीएसपी और इससे ऊपर की रैंक के अधिकारी ही मामले की जांच कर सकते थे। अब एनआइए के इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी भी अनुमति के बाद जांच में शामिल किए जा सकते हैं।
ताकतवर बनें एजेंसी- पूर्व पुलिस महानिदेशक
पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह का मानना है कि दुरुपयोग तो भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) का भी हो सकता है। इसके डर से हम मजबूत कानून नहीं बनाएं? जिस तरह से अपराधी ताकतवर हो रहा है और बुलंदी पर पहुंच रहा है, उसको देखते हुए जांच एजेंसियों को भी ताकतवर बनाना जरूरी है।
समग्र कार्यक्रम हो- मानवाधिकार कार्यकर्ता
मानवाधिकार कार्यकर्ता लेनिन रघुवंशी का कहना है कि ज्यादातर आतंक विरोधी कानून से संबंधित मामलों में दोष साबित करने की दर बहुत कम है। किसी नागरिक को कभी भी उठाकर बंद कर दिया जाए, ऐसे कानून खत्म हों। आतंकवाद व गैर कानूनी गतिविधियां रोकने के लिए समग्र कार्यक्रम होना चाहिए।
आंकड़े बता रहे हैं आतंकवाद की तस्वीर:
-278 मामले एनआइए में दर्ज हैं 31 जुलाई 2019 तक
-54 मामलों में फैसला आया, इनमें से 48 मामलों में सजा हुई
-91% सजा की दर
-221 को सजा हुई
-92 आरोपियों को अदालत ने किया दोषमुक्त
1 जून 2014 से 19 जुलाई तक 198 में से 131 मामलों में चार्जशीट :-
-109 मामले आतंकवाद के
-27 मामले वामपंथ उग्रवाद के
-47 मामले उत्तर पूर्व में आतंकी समूह के खिलाफ
-14 मामले खालिस्तानी ग्रुपों के
-45 मामले विदेशी मुद्रा और हवाला के, 36 अन्य मामले
 
विपक्ष की आशंकाएं और गृह मंत्री अमित शाह के जवाब…
आशंका: सरकार किसी को भी आतंकवादी घोषित कर सकती है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि इसके लिए प्रक्रिया में 4 बिंदू तय किए हैं- जब कोई आतंकवादी गतिविधियों में भाग लेता है, आतंकवाद के लिए तैयारी करने में मदद करता है, आतंकवाद की अभिवृद्धि करता है, इसकी कार्ययोजना बनाता है।
आशंका: सरकार इसका सियासी दुरुपयोग करेगी।
शाह ने बताया कि ऐसा नहीं है अपील के लिए सरकार की कमेटी है। यहां खारिज हो जाए तो हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज के नेतृत्व में समीक्षा कमेटी है, जो इस पर विचार करेगी। उसके बाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील हो सकती है।
आशंका: अचानक, बिना पूछताछ भी आतंकी घोषित कर दिया जाएगा।गृहमंत्री शाह के मुताबिक यदि कोई उपलब्ध ही नहीं है तो उससे पूछताछ कैसे करेंगे? ऐसा करेंगे तो हाफिज सईद और दाऊद इब्राहिम को यूएन के घोषित करने के बाद भी आतंकी घोषित नहीं कर पाएंगे। मगर आमतौर पर जब वह उपलब्ध होगा तो पूछताछ और साक्ष्य जुटाने के बाद ही कुछ करेंगे।
आशंका: जांच अधिकारी का स्तर घटा दिया गया है।अमित शाह ने कहा कि जांच एसपी-डिप्टी एसपी स्तर पर ही होगी, पर कोर्ट में मौजूद रहने के लिए इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी को काम सौंपा है। एनआइए में करीब 30 एसपी ही हैं।

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