बुलंदशहर हिंसा: जीतू फौजी समेत सात लोगों को हाईकोर्ट से मिली जमानत, इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की गई थी जान

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क्या हुआ था 3 दिसंबर को बुलंदशहर जिले के स्याना थाना क्षेत्र के चिंगरावठी गांव में 3 दिसंबर को गोकशी की सूचना पर जमकर बवाल हुआ था। इस दौरान गुस्साए लोगों ने चिंगरावटी चौराहे को जाम कर दिया और पुलिस चौकी में खड़े वाहनों में आग लगा दी थी। इस घटना में स्याना इंस्पेक्टर सुबोध कुमार और भाजपा कार्यकर्ता सुमित कुमार की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने बजरंग दल के जिला संयोजक योगेशराज समेत 27 नामजद व 50-60 अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जीतू फौजी का नाम आया था सामने गोकशी की सूचना को लेकर हुए हिंसा में पुलिस ने महाब गांव निवासी जीतू फौजी का नाम सामने आया था। साथ ही वायरल वीडियो में भी फौजी अवैध कट्टे के साथ देखा गया है। इसी को आधार बनाकर पुलिस जांच में जुट गई थी। पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों ने जम्मू में फौजी की यूनिट के अधिकारियों से बात की और 8 दिसंबर को जीतू फौजी को गिरफ्तार कर एसआईटी की टीम बुलंदशहर ले आई थी। SIT कर रही है मामले की जांच हिंसा मामले की जांच एसआईटी कर रही थी। जिसमें कुछ नेताओं समेत 44 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका था। बता दें कि इस मामले में करीब 14 आरोपियों को हिंसा के मामले में जमानत हो चुकी है, लेकिन कुछ ही दिन पहले लगाए गए राजद्रोह की धारा में आरोपियों को जमानत नहीं मिल सकी थी। अधिवक्ता संजय शर्मा ने बताया कि मंगलवार को आरोपी जितेंद्र उर्फ जीतू फौजी, सचिन पुत्र वीरेंद्र, छोटू पुत्र सतीश जाट, सौरभ पुत्र राजकुमार, हेमू उर्फ हेमराज पुत्र नवाब, कलवा पुत्र बाबूराम और रोहित राघव पुत्र राम अवतार राघव की जमानत अर्जी मंजूर हो गई है। जल्द ही आदेश मिलते ही सातों आरोपियों की जेल से रिहाई हो जाएगी।

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