तंत्रिकाओं की क्षति से कम डोपामाइन बनना है पार्किंसन



पार्किंसन रोग ( Parkinson’s disease ) में दिमाग की तंत्रिकाएं धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने से ये पर्याप्त मात्रा में डोपामाइन हार्मोन नहीं बना पातीं। डोपामाइन की कमी से दिमाग की शरीर के मूवमेंट को नियंत्रित करने की क्षमता कम होने लगती है। इससे मांसपेशियों का कड़ा होना, कंपकंपी, मूवमेंट धीमे होना, चलने का ढंग व पॉश्चर बदलना, ठीक प्रकार से बोल या लिख न पाना और शरीर का संतुलन गड़बड़ाना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। समय रहते पहचान व इलाज न लेने से इसके लक्षण अधिक गंभीर हो जाते हैं। शोधों के मुताबिक यह रोग पुरुषों को ज्यादा होता है।
क्या यह लाइलाज बीमारी है? हालांकि पार्किंसन का कोई इलाज नहीं है लेकिन नियमित एक्सरसाइज से शरीर का संतुलन सुधारा जा सकता है।फिजियोथैरेपिस्ट, न्यूट्रिशनिस्ट और न्यूरोसर्जन पार्किंसन रोगियों के जीवन की गुणवत्ता सुधारने में सहायता कर सकते हैं।
हाथ-पैरों में कंपकंपी, गर्दन हिलना ही लक्षण हैं? कंपकंपी आना पार्किंसन का सबसे सामान्य और प्रारंभिक लक्षण है। लेकिन किसी व्यक्तिके हाथ-पैरों में कंपकंपी आए तो यह जरूरी नहीं कि उसे पार्किंसन रोग ही है। इसके मरीजों में शरीर के एक तरफ कंपन और कड़ापन आ जाता है।
इसके इलाज में दवा कितनी कारगर है? पार्किंसन ( Parkinson’s ) को ठीक करने के लिए तो दवाइयां हैं। लेकिन यह समझना जरूरी है कि कोई भी दवा न तो इसे पूर्णत: ठीक कर सकती है व ना ही रोग का प्रभाव उलट सकती है। ज्यादातर दवाएं मरीज में डोपामाइन का स्तर बढ़ाती हैं। वहीं कुछ दवा सीधे तंत्रिका कोशिकाओं तक पहुंचाई जाती है जो डोपामाइन में परिवर्तित हो जाती है। दूसरी दवा डोपामाइन रिसेप्टर को स्टीमुलेट या एक्टिवेट करती है। रोग बढऩे पर डीप ब्रेन स्टीमुलेशन सर्जरी लंबा जीवन जीने में मदद करती है।



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